नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में इन दिनों चुनाव आयोग (Election Commission) और विपक्षी दलों के बीच घमासान अपने चरम पर पहुंच चुका है। वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) और अंदरूनी असहमति के दावों के बीच, विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक कदम उठाने की तैयारी कर ली है।
ममता बनर्जी की पहल पर दिल्ली में जुटेंगे तमाम दिग्गज
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की विशेष पहल के बाद, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आगामी 30 सितंबर को नई दिल्ली के 'कॉन्स्टिट्यूशन क्लब' में इंडिया गठबंधन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है।
इस साझा बैठक में देशभर में बड़े पैमाने पर संयुक्त विरोध प्रदर्शन करने और संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक नया कानूनी प्रस्ताव लाने पर मुहर लगेगी। इस अहम बैठक से ठीक एक दिन पहले, यानी 29 सितंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की भी गुप्त बैठक बुलाई गई है, जिसमें पार्टी इस पूरे राजनीतिक घमासान पर अपनी अंतिम रणनीति तैयार करेगी।
"ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना ही होगा": टीएमसी और लेफ्ट आए एक मंच पर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले टीएमसी और वामपंथी दल (CPIM) इस राष्ट्रीय मुद्दे पर पूरी तरह से एक होते नजर आ रहे हैं। ममता बनर्जी ने इस बड़े सियासी घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता एम.ए. बेबी से लंबी फोन पर बातचीत की है।
टीएमसी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कड़े तेवर दिखाते हुए दो टूक कहा, "हमारी सबसे पहली और अंतिम शर्त यही है कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा। इसके अलावा सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया और एसआईआर जैसे फर्जीवाड़े हमारे मुख्य एजेंडे में हैं।" वहीं, CPI(ML)-लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी इस बैठक का स्वागत करते हुए मांग की है कि एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए, क्योंकि इससे लाखों वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटने का खतरा पैदा हो गया है।
संसद में आ सकता है तीसरा 'रिमूवल नोटिस'
विपक्ष अब चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में एक नया और कड़ा 'रिमूवल नोटिस' (पद से हटाने का प्रस्ताव) लाने की पुख्ता तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसके ड्राफ्ट पर कानूनी विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है और हरी झंडी मिलते ही इसे संसद में पेश कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का यह अब तक का तीसरा ऐसा प्रयास होगा।
विपक्ष के इस आक्रामक तेवर को हवा तब मिली जब हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े कई अहम फैसलों पर कथित तौर पर 14 बार अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
चुनाव आयोग की सफाई: "सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए"
विपक्ष के चौतरफा हमलों और आंतरिक मतभेदों की मीडिया रिपोर्ट्स के बाद चुनाव आयोग (ECI) ने भी चुप्पी तोड़ते हुए अपना आधिकारिक पक्ष रखा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति से ही जारी किए गए थे।
चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी संवैधानिक संस्था के भीतर अलग-अलग राय या टिप्पणियां होना एक बेहद स्वाभाविक प्रशासनिक प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी याद दिलाया कि 24 जून 2025 को जारी किए गए एसआईआर के इस आदेश को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी अपने 27 मई 2026 के आदेश में पूरी तरह से जायज ठहराया था। जनता की सहूलियत के लिए आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस पाने वाले लोगों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई केंद्रों के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके साथ ही दावों और आपत्तियों की समय सीमा को भी दिल्ली में 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है।
