हार्मोनल असंतुलन से कैसे बचें? | Source: Onlymyhealthहार्मोनल असंतुलन से कैसे बचें? Source : Onlymyhealth

आधुनिक जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, बढ़ता तनाव, जंक फूड और पर्याप्त नींद की कमी का सबसे ज्यादा असर शरीर के हार्मोन्स पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हार्मोनल असंतुलन आज सिर्फ महिलाओं तक सीमित समस्या नहीं रह गई है, बल्कि पुरुषों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। हार्मोन्स शरीर के ऐसे रासायनिक संदेशवाहक होते हैं, जो भूख, नींद, मेटाबॉलिज्म, मूड, प्रजनन क्षमता, ऊर्जा और शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो इसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, हार्मोनल असंतुलन को समय रहते नजरअंदाज करना भविष्य में थायराइड, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), मधुमेह, मोटापा, बांझपन, मानसिक तनाव और हृदय संबंधी बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है। अच्छी बात यह है कि जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव अपनाकर इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

ये 5 गलत आदतें हार्मोनल असंतुलन की बन रही हैं सबसे बड़ी वजह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें अनजाने में हार्मोन्स का संतुलन बिगाड़ रही हैं। इनमें सबसे पहली आदत है देर रात तक जागना और मोबाइल, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का लगातार इस्तेमाल करना। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के निर्माण को प्रभावित करती है, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती और तनाव बढ़ाने वाला कोर्टिसोल हार्मोन असंतुलित हो जाता है।

दूसरी बड़ी वजह है जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, पैकेटबंद स्नैक्स और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन। ऐसे खाद्य पदार्थ इंसुलिन के स्तर में अचानक उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और मोटापा, पीसीओएस तथा डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा पूरे दिन कुर्सी पर बैठकर काम करना, किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि न करना और नियमित व्यायाम से दूरी बनाना भी हार्मोनल असंतुलन की एक बड़ी वजह है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण शरीर की कैलोरी सही तरीके से खर्च नहीं हो पाती और हार्मोन्स का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने लगता है।

लगातार मानसिक तनाव भी शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है। तनाव की स्थिति में शरीर लगातार कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन्स का अधिक उत्पादन करता है, जिससे अन्य जरूरी हार्मोन्स का संतुलन प्रभावित होने लगता है। वहीं, तेजी से वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट अपनाना, लंबे समय तक भूखे रहना या बार-बार खाना छोड़ देना भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इससे शरीर ऊर्जा बचाने की स्थिति में चला जाता है और कई महत्वपूर्ण हार्मोन्स का उत्पादन प्रभावित होने लगता है।

हार्मोनल असंतुलन से शरीर में दिख सकते हैं ये गंभीर बदलाव

डॉक्टरों के अनुसार, हार्मोनल असंतुलन का असर केवल एक अंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, पीसीओएस, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे, बाल झड़ना और गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। वहीं पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने, थकान, मांसपेशियों की कमजोरी, यौन इच्छा में कमी और वजन बढ़ने जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं।

इसके अलावा बिना कारण वजन बढ़ना या घटना, हर समय थकान महसूस होना, मूड में लगातार बदलाव, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, याददाश्त कमजोर होना और काम में मन न लगना भी हार्मोनल असंतुलन के सामान्य संकेत माने जाते हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर थायराइड, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

डॉक्टरों ने बताए हार्मोन्स को संतुलित रखने के असरदार उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि हार्मोनल असंतुलन से बचने के लिए सबसे पहले जीवनशैली में सुधार करना जरूरी है। रोजाना संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए, जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, दालें, दही, सूखे मेवे और हेल्दी फैट्स शामिल हों। अत्यधिक तला-भुना, प्रोसेस्ड और अधिक चीनी वाला भोजन कम से कम खाना चाहिए।

हर दिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चाल से चलना, योग, साइकिल चलाना, तैराकी या हल्का व्यायाम करना शरीर के लिए लाभदायक माना जाता है। इसके साथ ही प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लेना भी बेहद जरूरी है। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कर सके।

तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग, ध्यान, प्राणायाम और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आंतों की अच्छी सेहत हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए भोजन में दही, छाछ, फाइबर युक्त फल और हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।

इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

यदि बिना किसी कारण लगातार थकान बनी रहती है, अचानक वजन बढ़ने या घटने लगता है, बाल तेजी से झड़ रहे हैं, बार-बार मुंहासे हो रहे हैं, महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो रहे हैं, पुरुषों में यौन इच्छा कम हो रही है, नींद पूरी नहीं हो रही या मूड में लगातार बदलाव महसूस हो रहे हैं, तो इन्हें सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा कर सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बिना देरी किए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर थायराइड प्रोफाइल, ब्लड शुगर, विटामिन डी, विटामिन बी-12, इंसुलिन लेवल और अन्य आवश्यक जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। समय पर जांच और सही उपचार से हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव संभव है।