भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का लाडली बहना योजना को लेकर दिया गया बयान इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित बुंदेली समागम-2026 में एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री यादव ने मजाकिया अंदाज में कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि लाडली बहना योजना सरकार के लिए कितनी खर्चीली है। उनके इस बयान पर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
कार्यक्रम के दौरान छतरपुर की बुंदेली कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से बेटियों और महिलाओं के लिए सरकार की आगामी योजनाओं को लेकर सवाल किया। जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने के समय इस बात का अंदाजा नहीं था कि लाडली बहना योजना का आर्थिक भार इतना अधिक होगा।
मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें क्या मालूम था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ेगी। उन्होंने योजना को काफी खर्चीली बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए सरकार की ओर से सहायता जारी रहेगी।
1000 रुपये से शुरू हुआ सफर, अब 1500 रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि लाडली बहना योजना की शुरुआत महिलाओं को 1000 रुपये मासिक सहायता देने से हुई थी। शुरुआती दौर में योजना को लागू करने में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं, लेकिन सरकार ने इसे आगे बढ़ाया और वर्तमान में पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद बिन्नू रानी से कहा कि अभी वह इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। उम्र बढ़ने के बाद पात्रता पूरी होने पर उन्हें भी योजना का लाभ मिलने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के बयान पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले लाडली बहना योजना को महिलाओं के सम्मान से जोड़कर पेश किया गया, जबकि सत्ता में आने के बाद इसे परेशानी बताया जा रहा है।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं और चुनावी वादों के बीच अंतर दिखाई देने लगा है।
लाडली बहना योजना पर सरकार का बड़ा आर्थिक खर्च
लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख महिला-केंद्रित योजनाओं में शामिल है। वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस योजना पर राज्य सरकार को सालाना करीब 22,680 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
योजना में लाभार्थियों की बड़ी संख्या होने के कारण इसका वित्तीय प्रभाव राज्य के बजट पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के ‘महंगी पड़ गई’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
शिवराज सिंह चौहान सरकार ने शुरू की थी योजना
मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जनवरी 2023 को की थी। इसके बाद 5 मार्च 2023 को योजना की औपचारिक शुरुआत हुई और जून 2023 में महिलाओं के खातों में पहली मासिक किस्त पहुंचाई गई।
शुरुआत में पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये देने का प्रावधान था। बाद में सहायता राशि बढ़ाकर 1250 रुपये की गई और नवंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर बहस
मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बच्ची के सवाल का जवाब हल्के-फुल्के अंदाज में दिया था और उनके बयान को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
वहीं, दूसरी ओर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इसे सरकार के सामने योजना के बढ़ते वित्तीय बोझ की स्वीकारोक्ति के तौर पर देख रहे हैं। चुनावी राजनीति के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान अब भाजपा और कांग्रेस के बीच बहस का नया मुद्दा बनता नजर आ रहा है।
