उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, उन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसी सिलसिले में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने अवध, कानपुर और गोरखपुर क्षेत्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक मजबूती पर मंथन किया।

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2022 और 2024 में मिली हार वाली सीटों पर विशेष रणनीति

भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में 255 सीटें और एनडीए गठबंधन को 274 सीटें मिली थीं। वहीं 129 विधानसभा सीटों पर गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 33 और एनडीए को 36 सीटें मिलीं, जबकि 44 सीटों पर हार झेलनी पड़ी। इन्हीं सीटों को 2027 चुनाव के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए पार्टी ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

खामियों पर मंथन, कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाने के निर्देश

रविवार को हुई बैठक में संबंधित विधानसभा क्षेत्रों और जिलों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और क्षेत्र की जानकारी रखने वाले कार्यकर्ताओं को बुलाया गया। बैठक में पिछले चुनावों की कमियों की समीक्षा की गई और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव मांगे गए। साथ ही कार्यकर्ताओं को अभी से क्षेत्र में सक्रिय होकर जनता के बीच जाने और संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

15 जुलाई तक नई टीम, जुलाई अंत तक बदल सकते हैं आधे प्रवक्ता

प्रदेश की नई टीम के गठन के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने मोर्चों और क्षेत्रीय अध्यक्षों को 15 जुलाई तक अपनी-अपनी टीमों की घोषणा करने के निर्देश दिए हैं। सक्रिय सदस्यों और पदाधिकारियों को प्राथमिकता देने तथा निष्क्रिय लोगों की जगह नए चेहरों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा पार्टी में वर्तमान 16 प्रवक्ताओं में से 7-8 प्रवक्ताओं को बदले जाने की संभावना है। इस बार मुख्य प्रवक्ता का नया पद भी बनाया गया है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि विधानसभा चुनाव से पहले अनुभवी और प्रभावी प्रवक्ताओं की टीम तैयार हो, जो मीडिया में भाजपा का पक्ष मजबूती से रख सके।