बिहार की राजनीति में कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की अचानक हुई मुलाकात ने एक बार फिर राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। लंबे समय बाद 7, सर्कुलर रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात को आरसीपी सिंह ने ‘बेहद आत्मीय’ बताया, लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) ने इसे महज एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात करार देते हुए राजनीतिक महत्व से इनकार कर दिया। इसके साथ ही जेडीयू नेतृत्व की ओर से आए तीखे बयान ने साफ संकेत दिया कि पार्टी के भीतर आरसीपी सिंह की वापसी को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।नीतीश-आरसीपी मुलाकात | फोटो: कलम लोक

नीतीश-आरसीपी मुलाकात | फोटो: कलम लोक

मुलाकात के बाद JDU का तीखा जवाब, नीरज कुमार ने साधा सीधा निशाना

आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार की मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जब आरसीपी सिंह मुख्यमंत्री से मिले होंगे तो उन्होंने जरूर कहा होगा-“हुजूर गलती हो गई, माई-बाप माफ कर दीजिए, अब आगे ऐसा नहीं होगा।” नीरज कुमार ने यह भी कहा कि सुबह आठ बजे की यह सामान्य मुलाकात थी और इसका कोई विशेष राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उनके अनुसार, जेडीयू को कभी ‘इतिहास’ बताने वाले आरसीपी सिंह आज उसी नेतृत्व की शरण में पहुंचे हैं, जिसकी उन्होंने कभी आलोचना की थी।

एक समय JDU के सबसे ताकतवर नेताओं में थे आरसीपी सिंह

बिहार की राजनीति में आरसीपी सिंह का सफर कभी बेहद प्रभावशाली रहा है। वे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, राज्यसभा में पार्टी का नेतृत्व किया और केंद्र सरकार में मंत्री भी बने। उन्हें नीतीश कुमार का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता था। हालांकि बाद के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मतभेद बढ़ते गए। पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक राह चुनी, बाद में जन सुराज से जुड़े, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद उनकी सक्रियता धीरे-धीरे कम होती गई। हाल के महीनों में वे लगातार सार्वजनिक मंचों से नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार की तारीफ करते दिखाई दिए, जिससे उनकी वापसी की चर्चाएं तेज हो गईं।

क्या वापसी आसान होगी? JDU के भीतर दिख रही है मजबूत विरोधी लॉबी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात जरूर हुई है, लेकिन इसका अर्थ तत्काल राजनीतिक पुनर्वापसी नहीं माना जा सकता। जेडीयू के भीतर एक प्रभावशाली वर्ग आरसीपी सिंह की वापसी के पक्ष में नहीं दिख रहा। नीरज कुमार के तीखे बयान को उसी आंतरिक असंतोष की अभिव्यक्ति माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरसीपी सिंह के भविष्य पर फैसला केवल पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। इससे संकेत मिलता है कि यदि वापसी की कोई संभावना बनती भी है, तो उसके लिए संगठन के भीतर कई स्तरों पर सहमति बनानी होगी।

बिहार चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल, मुलाकात के मायने तलाश रही राजनीति

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह मुलाकात केवल व्यक्तिगत शिष्टाचार है या किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की भूमिका, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। हालांकि आरसीपी सिंह ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा कर मुलाकात को ‘आत्मीय’ बताया, लेकिन जेडीयू की आधिकारिक प्रतिक्रिया ने इस संदेश को संतुलित करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में यदि दोनों नेताओं के बीच संवाद आगे बढ़ता है या पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई नया संकेत मिलता है, तो बिहार की राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं। फिलहाल यह मुलाकात जितनी चर्चा का विषय बनी है, उससे कहीं अधिक जेडीयू के भीतर की राजनीति और आगामी चुनावी रणनीति पर नजरें टिक गई हैं।