बिहार के राज्यपाल सैयद अत्ता हसनैन
पटना, 18 जुलाई 2026। महामहिम राज्यपाल बिहार एवं खुदा बख्श लाइब्रेरी बोर्ड के चेयरमैन, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन अपनी पत्नी के साथ 18 जुलाई 2026 को खुदा बख्श लाइब्रेरी पहुंचे। उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक लाइब्रेरी और वहां संरक्षित दुर्लभ धरोहरों का अवलोकन किया। खुदा बख्श लाइब्रेरी के निदेशक प्रो. मुहम्मद जाहिदुल हक ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया तथा दोनों को गुलदस्ता और शॉल भेंट किया। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल ने खुदा बख्श लाइब्रेरी के नवीनतम अंक का विमोचन भी किया।
राज्यपाल ने लाइब्रेरी के रेफरेंस रूम, म्यूज़ियम रूम और पांडुलिपि स्टैक रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन के कार्य को भी ध्यानपूर्वक देखा और इस तकनीक की सराहना की। इस दौरान उन्होंने रीडिंग रूम में मौजूद पाठकों से भी मुलाकात की। निरीक्षण के दौरान उन्हें मेडिकल साइंस और सर्जरी से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियां किताब अल-हशाइश, किताब अल-तसरीफ, तारीख-ए-खानदान-ए-तैमूरिया, शाहनामा, तथा दीवान-ए-हाफिज की वह दुर्लभ प्रति दिखाई गई, जिस पर हुमायूं और जहांगीर के हस्ताक्षर दर्ज हैं।

फिरदौसी के शाहनामा की लघु चित्रकलाओं (मिनिएचर पेंटिंग्स) को देखने के बाद राज्यपाल ने कहा कि इस लाइब्रेरी की अमूल्य धरोहरों को देखने के लिए एक बार आना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा महाराजा रणजीत सिंह की सेना के लेखा-जोखा (रणजीत सिंह की डायरी), दक्षिण भारत के देवी-देवताओं एवं उनकी अंग्रेज़ी प्रार्थनाओं से संबंधित पांडुलिपियां, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, भागवत पुराण, तथा पक्षियों के दुर्लभ एल्बम सहित कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां भी उनके अवलोकन के लिए प्रस्तुत की गईं।
महामहिम राज्यपाल ने इन सभी दुर्लभ धरोहरों को गहरी रुचि के साथ देखा और उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। वे लाइब्रेरी में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों, उनके रखरखाव तथा संरक्षण कार्य से अत्यंत प्रभावित हुए और लाइब्रेरी के कार्यों की सराहना की। अंत में उन्हें लाइब्रेरी के प्रकाशनों की कुछ पुस्तकें भी भेंट की गईं।
