बांग्लादेश में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। सत्ता में आते ही उनके रुख में बदलाव देखने को मिला है।

तारिक रहमान ने ‘जुलाई चार्टर’ की दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया है। जुलाई चार्टर में 80 से अधिक प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें 47-48 संवैधानिक संशोधन भी शामिल हैं। इन प्रस्तावों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल को सीमित करने और संसद को द्विसदनीय बनाने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।

प्रस्ताव के अनुसार 100 सदस्यों वाला एक उच्च सदन गठित किया जाएगा, जो पार्टियों के वोट प्रतिशत के आधार पर बनेगा। साथ ही, देश में किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए इस उच्च सदन की मंजूरी अनिवार्य होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीएनपी जुलाई चार्टर पर सहमति जताती, तो संसद की संरचना में बड़ा बदलाव हो सकता था। फिलहाल, रहमान के इस फैसले से बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।