झारखंड के गोड्डा टाउन के रहने वाले मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने 10वीं की स्टेट बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। इतना ही नहीं, वे दिव्यांग श्रेणी में टॉपर भी बने हैं। उनकी सफलता की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग उनकी मेहनत और हिम्मत की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

हाल ही में फ़ैज़ानउल्ला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। वीडियो में वे अपने दांतों के बीच कलम दबाकर कॉपी पर लिखते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल, सेरेब्रल पाल्सी की वजह से उनके हाथ और पैर बचपन से ठीक तरह काम नहीं करते। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी।

फ़ैज़ानउल्ला और उनका परिवार हमेशा चाहता था कि वह अच्छी शिक्षा हासिल करें और अपने सपनों को पूरा करें। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में लगातार मेहनत की। परीक्षा के दौरान उन्हें राइटर की सुविधा भी दी गई थी, लेकिन उन्होंने अपनी ज्यादातर उत्तर पुस्तिका खुद ही लिखी। यह उनकी मेहनत और आत्मविश्वास को दिखाता है।

फ़ैज़ानउल्ला कभी दूसरे बच्चों की तरह नियमित रूप से स्कूल नहीं जा सके। बीमारी की वजह से उनके लिए रोजाना स्कूल जाना बेहद मुश्किल था। लेकिन उनके परिवार और शिक्षकों ने उनका पूरा साथ दिया। घर पर रहकर ही उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कभी खुद को कमजोर नहीं समझा।

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में फ़ैज़ानउल्ला ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख नहीं है कि वे सामान्य बच्चों की तरह स्कूल की कक्षाओं में नहीं पढ़ सके। उनका कहना है कि उनके अंक खुद साबित करते हैं कि पढ़ाई के मामले में वे किसी से कम नहीं हैं।

फ़ैज़ानउल्ला के पिता मोहम्मद अनवार आलम एक प्राइवेट मदरसे में शिक्षक हैं। उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में शुरू से ही खास भूमिका निभाई। जब फ़ैज़ानउल्ला करीब पांच साल के थे, तब उनके पिता ने घर पर ही उन्हें पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में मौखिक रूप से उर्दू, अरबी, हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित की शिक्षा दी गई।

धीरे-धीरे फ़ैज़ानउल्ला की पढ़ाई आगे बढ़ती गई। जब वे आठ साल के हुए तो उनका दाखिला स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में कराया गया। हालांकि शारीरिक परेशानी की वजह से वे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाए। इसके बाद स्थानीय शिक्षक आदिल हुसैन ने घर पर आकर उन्हें पढ़ाना शुरू किया।

फ़ैज़ानउल्ला की सफलता के पीछे उनके परिवार की मेहनत और शिक्षकों का सहयोग भी बड़ी वजह माना जा रहा है। सीमित संसाधनों और कठिन हालात के बावजूद परिवार ने कभी उनकी पढ़ाई रुकने नहीं दी।

आज फ़ैज़ानउल्ला की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है जो मुश्किल परिस्थितियों में हार मान लेते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो, तो शारीरिक परेशानियां भी उसके सपनों को नहीं रोक सकतीं।