fggf | Source: fgfgनई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया की दिग्गज कंपनी Meta के लिए अमेरिका से बेहद गंभीर कानूनी चुनौती सामने आई है। कंपनी के खिलाफ सोशल मीडिया की लत, बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कथित असर और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों की सुनवाई शुरू होने जा रही है। इस मामले में Meta पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 133.92 लाख करोड़ रुपये तक के संभावित जुर्माने का दावा सामने आया है। मामला इतना बड़ा है कि इसकी सुनवाई के दौरान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग और Instagram प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही भी हो सकती है।

कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में शुरू होगी सुनवाई

इस मामले की सुनवाई मंगलवार को कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित संघीय अदालत में शुरू होगी। Meta ने पिछले सप्ताह इस मामले को खारिज कराने की मांग की थी, लेकिन कंपनी की इस कोशिश को स्वीकार नहीं किया गया। अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

मामला केवल एक कंपनी पर लगाए गए सामान्य उपभोक्ता आरोपों तक सीमित नहीं है। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन और उनके कथित प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अमेरिकी राज्यों का आरोप है कि Meta ने ऐसे फीचर्स विकसित किए जो उपयोगकर्ताओं को उसके प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताने और कथित तौर पर उनकी निर्भरता बढ़ाने के लिए तैयार किए गए थे।

बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर भी गंभीर आरोप

Meta के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के कथित प्रभाव को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। अमेरिकी राज्यों का आरोप है कि कंपनी के प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं और कंपनी को इन संभावित प्रभावों की जानकारी थी।

आरोपों के अनुसार, Meta ने अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर लोगों को गुमराह किया और ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया जिनसे उपयोगकर्ता उसके ऐप्स पर अधिक समय तक जुड़े रहें। इस मामले में Facebook और Instagram दोनों का नाम प्रमुखता से सामने आया है।

2023 में शुरू हुई थी बड़ी कानूनी कार्रवाई

यह नया मुकदमा वर्ष 2023 में अमेरिकी राज्यों की ओर से Meta के खिलाफ दायर किए गए मामलों से जुड़ा हुआ है। कंपनी की सुरक्षा नीतियों को लेकर कई राज्यों में जांच के बाद यह कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी थी।

जांच में बच्चों और किशोरों को होने वाले कथित नुकसान से जुड़े मुद्दे सामने आने के बाद राज्यों ने Meta के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। अब इसी व्यापक कानूनी विवाद के एक महत्वपूर्ण हिस्से की सुनवाई कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में होने जा रही है।

चार राज्यों के आरोपों पर होगी सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश यवोन गोंजालेज रोजर्स कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी की ओर से लगाए गए आरोपों पर सुनवाई करेंगी। इन राज्यों का आरोप है कि Meta ने अपने ऐप्स की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के मामले में लोगों को जानबूझकर गुमराह किया और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किया।

इन आरोपों की सुनवाई इस बात पर भी केंद्रित हो सकती है कि Meta को अपने प्लेटफॉर्म के संभावित प्रभावों के बारे में क्या जानकारी थी और कंपनी ने उपयोगकर्ताओं, खासकर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए।

29 राज्यों ने COPPA उल्लंघन के आरोप लगाए

Meta के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा केवल चार राज्यों तक सीमित नहीं है। कुल 29 अमेरिकी राज्यों की ओर से कंपनी पर Children's Online Privacy Protection Act यानी COPPA के उल्लंघन के आरोप लगाए जा चुके हैं।

राज्यों का आरोप है कि Meta को यह जानकारी थी कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे Instagram और Facebook का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद कंपनी ने कथित तौर पर बच्चों और उनके माता-पिता की सहमति के बिना उनका डेटा एकत्र किया।

यदि अदालत में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह Meta के लिए गंभीर कानूनी और वित्तीय चुनौती बन सकती है। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और किसी भी संभावित दंड का फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

1.4 ट्रिलियन डॉलर के जुर्माने का दावा कितना बड़ा है?

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित जुर्माने की रकम को लेकर है। कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे अदालत से कितनी रकम के जुर्माने की मांग करेंगे।

हालांकि, Meta ने सुनवाई से पहले अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में दावा किया है कि संबंधित राज्य 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक के जुर्माने की मांग कर रहे हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 133.92 लाख करोड़ रुपये बैठती है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह रकम Meta की ओर से अदालत में किए गए दावे के रूप में सामने आई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने कंपनी पर इतनी राशि का जुर्माना तय कर दिया है। अंतिम जुर्माने की राशि, यदि कोई लगती है, तो न्यायिक प्रक्रिया के बाद तय होगी।

क्या मार्क जकरबर्ग को कोर्ट में गवाही देनी पड़ेगी?

मामले की एक बड़ी खासियत यह है कि Meta के शीर्ष अधिकारियों को भी सुनवाई के दौरान गवाही के लिए बुलाया जा सकता है। इनमें कंपनी के CEO मार्क जकरबर्ग का नाम शामिल है।

इसके अलावा Instagram प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही भी हो सकती है। दोनों से कंपनी की नीतियों, प्लेटफॉर्म के डिजाइन, बच्चों की सुरक्षा और उपयोगकर्ताओं पर सोशल मीडिया के कथित प्रभाव से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं।

हालांकि, गवाही की वास्तविक प्रक्रिया अदालत के आदेश और मुकदमे की कार्यवाही के अनुसार आगे बढ़ेगी।

Meta के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुकदमा?

यह मामला Meta के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कंपनी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कारोबारी मॉडल, उपयोगकर्ता सुरक्षा और बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता से जुड़े कई मुद्दे एक साथ सामने आ रहे हैं।

यदि राज्यों के आरोप अदालत में साबित होते हैं तो इसका असर Meta की नीतियों और उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों तथा किशोरों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। साथ ही संभावित वित्तीय दंड कंपनी के लिए बड़ा कानूनी और कारोबारी दबाव पैदा कर सकता है।

मामला अभी आरोपों और सुनवाई के चरण में

Meta के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। अदालत इसके बाद यह तय करेगी कि कंपनी ने कानूनों का उल्लंघन किया है या नहीं और यदि उल्लंघन साबित होता है तो उसके लिए क्या कानूनी परिणाम होंगे।

इसलिए 133.92 लाख करोड़ रुपये के संभावित जुर्माने को अभी अंतिम दंड नहीं माना जा सकता। यह वह अधिकतम राशि है जिसका दावा Meta ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में राज्यों की मांग के संदर्भ में किया है।