
ईद-उल-अजहा के मौके पर लगभग हर घर में बड़ी मात्रा में ताजा मांस आता है। इस त्योहार की सबसे बड़ी चुनौती होती है इस पवित्र तोहफे को लंबे समय तक सुरक्षित और ताजा रखना। अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे कीमती मांस चंद घंटों के भीतर ही खराब होने लगता है, उसमें से अजीब बदबू आने लगती है और उसका रंग बदल जाता है। फूड सेफ्टी एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों के मुताबिक, खराब या बैक्टीरिया-युक्त मांस का सेवन गंभीर फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। अगर आप इस मांस को लंबे समय के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आपको उन वैज्ञानिक कारणों को समझना होगा जो इसे सड़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। आइए जानते हैं कि मांस के रख-रखाव के दौरान आपको किन आदतों को तुरंत बदलने की जरूरत है।
पहली चूक: मांस को गर्म अवस्था में ही प्लास्टिक बैग में बंद करना
कुर्बानी के तुरंत बाद मांस को काले या साधारण बाजार वाले प्लास्टिक बैग में भरकर रख देना सबसे आम और उतनी ही खतरनाक गलती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, जब जानवर की कुर्बानी दी जाती है, तो उसके मांस का तापमान काफी अधिक होता है। यदि इस गर्म मांस को तुरंत हवा-रहित प्लास्टिक की थैलियों में बंद कर दिया जाए, तो उसके अंदर भाप और नमी जमा होने लगती है। गर्मी और नमी का यह मेल 'साल्मोनेला' और 'ई-कोलाई' जैसे हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। इसके कारण मांस कुछ ही घंटों में सड़ जाता है। इसका सही तरीका यह है कि मांस को पहले किसी बड़े साफ बर्तन, चटाई या ट्रे पर खुली और हवादार जगह पर फैलाकर रखें। जब इसकी प्राकृतिक गर्मी पूरी तरह निकल जाए और यह सामान्य कमरे के तापमान पर आ जाए, तभी इसे आगे के प्रोसेस के लिए लें।
दूसरी चूक: 'रिगर मोर्टिस' की प्रक्रिया से पहले ही मांस पकाना
कई घरों में मांस के आते ही तुरंत उसे पकाने की होड़ मच जाती है, जो कि मीट साइंस के अनुसार बिल्कुल गलत है। जानवर के कटने के बाद उसका शरीर एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया से गुजरता है जिसे 'रिगर मोर्टिस' कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान मांस के तंतु और मांसपेशियां पूरी तरह खिंचकर सख्त हो जाती हैं। यदि इस अवस्था में मांस को सीधे कड़ाही या कुकर में डाल दिया जाए, तो पकने के बाद भी वह बेहद कड़ा, रबर जैसा और बेस्वाद रहता है, जिसे चबाना और पचाना दोनों ही मुश्किल होता है। इसलिए, मांस को पकाने या फ्रीज करने से पहले कम से कम 3 से 4 घंटे का रेस्टिंग पीरियड देना अनिवार्य है। ठंडी और साफ हवा लगने से मांस के टिश्यूज प्राकृतिक रूप से ढीले और मुलायम हो जाते हैं, जिससे उसका स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतरीन हो जाते हैं।
तीसरी चूक: फ्रीजर में रखने से ठीक पहले मांस को पानी से धोना
यह एक ऐसा भ्रम है जिसे अधिकांश लोग स्वच्छता के नाम पर सही मानते हैं, लेकिन यह मांस की शेल्फ लाइफ को आधा कर देता है। अगर आप मांस को धोकर तुरंत फ्रीजर में रख रहे हैं, तो आप उसे सड़ने की ओर धकेल रहे हैं। धोने के कारण मांस की सतह पर पानी की एक परत रह जाती है। जब इस गीले मांस को डीप फ्रीज किया जाता है, तो वह पानी बर्फ के बड़े क्रिस्टल्स में बदल जाता है, जिससे विज्ञान की भाषा में 'फ्रीजर बर्न' कहा जाता है। फ्रीजर बर्न होने से मांस के सभी जरूरी पोषक तत्व और प्राकृतिक जूस नष्ट हो जाते हैं, और वह पूरी तरह बेस्वाद हो जाता है। इसके अलावा, बहते पानी में मांस धोने से उसके बैक्टीरिया पूरे किचन काउंटर और बर्तनों में फैल जाते हैं। सही तरीका यह है कि मांस को बिना धोए ही छोटे-छोटे हिस्सों में पैक करके फ्रीज करें। जब भी आपको इसे पकाना हो, तब फ्रीजर से निकालें और पकाने से ठीक पहले अच्छी तरह धोएं।
चौथी चूक: फ्रीजर के भीतर मांस का बड़ा ढेर लगा देना
कुर्बानी का बहुत सारा मांस एक या दो बड़े थैलों में भरकर फ्रीजर में ठूंस देना भी एक बड़ी लापरवाही है। फ्रीजर के काम करने का एक सिद्धांत होता है—उसे अंदर मौजूद चीजों को ठंडा करने के लिए लगातार ठंडी हवा का संचार करना पड़ता है। जब फ्रीजर को क्षमता से अधिक भर दिया जाता है या उसमें मांस का बहुत बड़ा ढेर रख दिया जाता है, तो ठंडी हवा का रास्ता ब्लॉक हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, जो मांस के टुकड़े पैकेट के बिल्कुल बीच में दबे होते हैं, उन तक कूलिंग पहुंच ही नहीं पाती। अपनी ही अंदरूनी गर्मी के कारण वह हिस्सा अंदर ही अंदर सड़ने लगता है, भले ही फ्रीजर बाहर से कितना भी ठंडा क्यों न दिख रहा हो। इससे बचने के लिए मांस को आधा या एक-एक किलो के छोटे, पतले और चपटे पैकेट्स में बांट लें और फ्रीजर में पैकेट्स के बीच थोड़ी जगह जरूर छोड़ें।
पांचवीं चूक: पैकेजिंग और तापमान के नियमों की अनदेखी
मांस को अखबार में लपेटना या घटिया क्वालिटी के प्लास्टिक में रखना सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है, क्योंकि अखबार की जहरीली स्याही मांस में आसानी से जज्ब हो सकती है। इसके साथ ही, तापमान का सही न होना भी मांस को खराब करता है। इंटरनेशनल फूड सेफ्टी मानकों के अनुसार, मांस को सुरक्षित रखने के लिए आपके फ्रीजर का तापमान हमेशा -18 डिग्री सेल्सियस या उससे कम होना चाहिए। मांस को स्टोर करने के लिए हमेशा एयरटाइट फूड-ग्रेड जिपलॉक बैग या मोटे एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल करें। पैकेट को बंद करते समय उसके अंदर की पूरी हवा को बाहर निकाल दें ताकि
ऑक्सीकरण न हो और मांस महीनों तक पूरी तरह ताजा बना रहे। इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर आप कुर्बानी के गोश्त को 6 से 9 महीने तक सुरक्षित रख सकते हैं।
