अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में गिना जाता है। 7 और 8 मई 2026 की दरम्यानी रात यही जलडमरूमध्य अचानक युद्ध जैसे हालात का गवाह बन गया, जब भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज ‘अल फ़ैज़ नूर सुलेमानी’ पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में गुजरात के एक भारतीय नाविक अल्ताफ तलाब केर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य भारतीय क्रू सदस्य घायल हो गए। यह हमला सिर्फ एक जहाज पर हुआ हमला नहीं था, बल्कि उस बढ़ते तनाव की भयावह तस्वीर भी था जो अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल चुका है। जिस समय हमला हुआ, उसी दौरान अमेरिकी युद्धपोत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे थे और क्षेत्र में लगातार हमले तथा जवाबी कार्रवाई चल रही थी। इसी ‘क्रॉसफायर’ में भारतीय जहाज फंस गया।



दुबई से यमन जा रहा था जहाज

इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन के महासचिव एडम भाया के अनुसार, भारतीय ध्वज वाला यह लकड़ी का कार्गो जहाज दुबई से यमन के मुक्कम बंदरगाह की ओर रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 18 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। 7-8 मई की रात भारतीय समयानुसार करीब ढाई बजे जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के करीब पहुंचा। उसी दौरान क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल गतिविधियां तेज थीं। अचानक एक ड्रोन जहाज के बेहद करीब आकर टकराया या विस्फोट हुआ, जिससे जहाज के ऊपरी हिस्से में भारी नुकसान हुआ। हमला इतना अचानक था कि क्रू मेंबर्स को संभलने तक का मौका नहीं मिला। विस्फोट के बाद जहाज पर अफरा-तफरी मच गई। कई नाविक घायल हो गए और गुजरात के द्वारका निवासी अल्ताफ तलाब केर गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।


कैसे हुआ हमला?

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह हमला किसी सुनियोजित टारगेटेड ऑपरेशन का हिस्सा था या नहीं, इसकी पुष्टि अब तक नहीं हुई है। लेकिन समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज उस समय सक्रिय सैन्य तनाव वाले इलाके से गुजर रहा था, जहां ड्रोन, मिसाइल और निगरानी गतिविधियां लगातार जारी थीं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाले जहाज अक्सर क्षेत्रीय संघर्षों के बीच फंस जाते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग पर खतरा और बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि जिस समय हमला हुआ, उसी दौरान तीन अमेरिकी युद्धपोत भी उस रास्ते से गुजर रहे थे। ऐसे में ड्रोन हमले और जवाबी फायरिंग के बीच भारतीय जहाज ‘क्रॉसफायर’ की चपेट में आ गया।



घायल नाविकों की हालत कैसी है?

हमले में चार भारतीय नाविक घायल हुए। एक के हाथ में फ्रैक्चर हुआ, दूसरे की ठोड़ी पर तेज वस्तु लगी, जबकि दो अन्य हल्के रूप से झुलस गए। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। समुद्री अधिकारियों के मुताबिक, जहाज के बाकी चालक दल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। भारतीय दूतावास और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


दुबई में रुका शव, परिवार करेगा फैसला

मारे गए नाविक अल्ताफ तलाब केर गुजरात के द्वारका जिले के जाम सलाया कस्बे के रहने वाले थे। उनके निधन की खबर गांव पहुंचते ही मातम छा गया। परिवार के सदस्य दुबई पहुंच चुके हैं।इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन ने भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में मदद मांगी है। अब परिवार यह तय करेगा कि अंतिम संस्कार दुबई में किया जाएगा या शव भारत लाया जाएगा।


क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यही वजह है कि अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के बीच किसी भी तनाव का सबसे बड़ा असर इसी इलाके पर दिखाई देता है।विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में यहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। ड्रोन युद्ध और समुद्री हमलों की बढ़ती घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी इसका असर पड़ सकता है।



अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी सामने आया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान की ओर से शांति प्रस्ताव पर जवाब मिलने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि ईरान जानबूझकर बातचीत को धीमा कर रहा है या नहीं। लेकिन जिस तरह समुद्र के बीच एक भारतीय जहाज युद्ध जैसे हालात में फंस गया, उसने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया का तनाव अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों और आम नाविकों की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है।


समुद्र में बढ़ता खतरा और भारतीय नाविक

भारत के हजारों नाविक खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम करते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने उनकी सुरक्षा को बड़ा सवाल बना दिया है। ‘अल फ़ैज़ नूर सुलेमानी’ पर हुआ हमला यह याद दिलाता है कि समुद्र में काम करने वाले नाविक सिर्फ व्यापारिक जहाज नहीं चला रहे होते, बल्कि कई बार वे वैश्विक संघर्षों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे होते हैं।