आज के तेज़ रफ्तार जीवन में तनाव (Stress) और एंग्जायटी (Anxiety) सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अब ये प्रजनन क्षमता (Fertility) को भी प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता मानसिक दबाव महिलाओं के मां बनने के सपने में बड़ी रुकावट बनता जा रहा है यहां तक कि IVF (In Vitro Fertilization) जैसी आधुनिक तकनीकों की सफलता दर पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर लगातार तनाव में रहता है, तो हार्मोनल बैलेंस बिगड़ने लगता है। खासकर कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो ओवुलेशन (Ovulation) और एग क्वालिटी को प्रभावित करता है। इसका सीधा असर IVF प्रक्रिया पर पड़ता है, क्योंकि इसमें अच्छे गुणवत्ता वाले एग और सही हार्मोनल माहौल बेहद जरूरी होता है।
महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी तनाव का असर देखा जा रहा है। लगातार चिंता और मानसिक दबाव स्पर्म काउंट और उसकी गुणवत्ता को कम कर सकता है। ऐसे में IVF के जरिए गर्भधारण की संभावना भी घट सकती है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि IVF प्रक्रिया खुद भी एक इमोशनल जर्नी होती है। बार-बार के टेस्ट, दवाइयां और परिणाम की अनिश्चितता मरीजों में एंग्जायटी बढ़ा देती है, जिससे एक नेगेटिव साइकल बन जाता है तनाव IVF को प्रभावित करता है और IVF की प्रक्रिया तनाव को बढ़ाती है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। योग, मेडिटेशन, काउंसलिंग और पर्याप्त नींद तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। साथ ही, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि IVF के दौरान कपल्स को भावनात्मक सपोर्ट और पॉजिटिव माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है।
बदलते समय में जहां टेक्नोलॉजी ने मां बनने की नई उम्मीदें दी हैं, वहीं यह भी साफ है कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी इन उम्मीदों को कमजोर कर सकती है। ऐसे में शरीर के साथ-साथ मन को भी स्वस्थ रखना उतना ही जरूरी है।
