
कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से ठीक पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक साथ मंच साझा कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कोलकाता में आयोजित एक विशाल जनसभा में ममता बनर्जी ने केजरीवाल को अपना छोटा भाई बताते हुए केंद्र पर तानाशाही का आरोप लगाया और दावा किया कि लोकतंत्र को बचाने की यह आखिरी लड़ाई है।
केजरीवाल के प्रति एकजुटता और 'जेल' का जवाब
रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी विपक्षी आवाजों को दबाने की एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि जेल की सलाखें किसी विचारधारा को कैद नहीं कर सकतीं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे 'जेल का जवाब वोट से' दें। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि केजरीवाल का अपराध सिर्फ इतना था कि उन्होंने गरीबों के लिए काम किया और आज जब वह बंगाल के समर्थन में खड़े हैं, तो यह विपक्षी एकता की जीत है।
27 लाख लोगों के नाम काटे गए
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा करते हुए ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से सुनियोजित तरीके से लगभग 27 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में उन मतदाताओं को निशाना बनाया गया है जो सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इसे "वोटों की डकैती" करार देते हुए कहा कि यह लाखों नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है और इसके पीछे भाजपा का हाथ है।
दूसरे चरण से पहले विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
दूसरे चरण की वोटिंग से पहले यह रैली विपक्ष के लिए एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में उभरी है। मंच पर ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के साथ हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) बंगाल की जमीन पर पूरी तरह एकजुट है। जानकारों का मानना है कि यह एकजुटता दूसरे चरण के मतदान में भाजपा विरोधी वोटों के बिखराव को रोकने में निर्णायक साबित हो सकती है।
भाजपा पर तीखा प्रहार
ममता बनर्जी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भाजपा पर हमला बोलते हुए उसे "जनविरोधी" करार दिया। उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल की जनता को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और संघीय ढांचे पर हमले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा ने पिछले दस वर्षों में विकास के नाम पर केवल जुमलेबाजी की है और अब उनकी विदाई का समय आ गया है।
चुनाव आयोग की सफाई और भाजपा का पलटवार
इन गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची का अपडेशन एक पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, नाम हटाने की प्रक्रिया में मृत व्यक्तियों, दोहरी प्रविष्टियों और स्थानांतरित मतदाताओं को नियमों के तहत ही बाहर किया गया है। वहीं, भाजपा ने इन दावों को "झूठ का पुलिंदा" बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी और केजरीवाल अपनी संभावित हार से डरकर संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगा रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।
