उफ़क साहिल
बिहार में चल रहे साइबर ठगी के एक बड़े मामले में अब अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आया है। जांच एजेंसियों को शक है कि इस गिरोह के तार चीन तक जुड़े हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम बॉक्स नेपाल के रास्ते बिहार लाए गए।
जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2025 में मंदीप नाम के एक आरोपी का संपर्क काठमांडु के जॉय नामक व्यक्ति से हुआ। इसके बाद नेपाल नंबर की गाड़ी से मधुबनी स्थित उसके घर पर ट्रॉली बॉक्स में सिम बॉक्स पहुंचाया गया। इसी मशीन की मदद से लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा था।
सिम बॉक्स क्या होता है
सिम बॉक्स एक ऐसी अवैध मशीन है जिसमें एक साथ कई सिम कार्ड लगाए जाते हैं।
यह मशीन विदेश से आने वाली कॉल को भारतीय लोकल नंबर में बदल देती है।
यानी कॉल बाहर से आती है, लेकिन मोबाइल पर भारतीय नंबर दिखाई देता है।
इसी वजह से लोग भरोसा कर लेते हैं और अपनी बैंक डिटेल या ओटीपी साझा कर देते हैं।
ठगी कैसे की जाती थी
लोगों को बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर कॉल किया जाता था।
कहा जाता था कि आपका खाता बंद हो जाएगा या केवाईसी अपडेट करनी है।
कुछ मामलों में पुलिस या कोर्ट का नाम लेकर डराया भी जाता था।
फिर ओटीपी या बैंक जानकारी लेकर पैसे निकाल लिए जाते थे।
नेपाल का रास्ता क्यों चुना गया?
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है।
सामान लाने-ले जाने में ज्यादा रोक-टोक नहीं होती।
ट्रैकिंग करना मुश्किल हो जाता है।
विदेशी नेटवर्क को भारत में उपकरण पहुंचाने में आसानी होती है।
जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क को बाहर से फंडिंग और तकनीकी मदद मिल रही थी।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ ठगी का मामला नहीं है।
अगर ऐसे उपकरण बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने लगे तो:
देश की टेलीकॉम सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
जासूसी या फर्जी प्रचार जैसे मामलों में भी दुरुपयोग हो सकता है।
अब पुलिस संदिग्ध बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और विदेशी लेनदेन की जांच कर रही है। कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पहले भी मिल चुके हैं ऐसे केस
देश के अलग-अलग राज्यों में सिम बॉक्स के जरिए ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन इस बार विदेशी कनेक्शन की आशंका ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अनजान कॉल पर बैंक या ओटीपी की जानकारी न दें।
डराने-धमकाने वाली कॉल पर तुरंत फोन काट दें
साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।
बिहार का यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराध अब स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित हो चुका है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं। आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।
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