बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के “चार बच्चे पैदा करने” वाले बयान के बाद देशभर में शुरू हुई बहस अब और तेज हो गई है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने प्रतिक्रिया देते हुए एक अलग ही दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसने चर्चा को नया मोड़ दे दिया है।
दरअसल, हाल ही में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से कम से कम चार बच्चे पैदा करने की अपील की थी। उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक मंचों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे निजी जीवन में दखल बताते हुए आलोचना की, तो कुछ ने इसका समर्थन भी किया।
इसी विवाद के बीच जीतन राम मांझी ने इस पूरे मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि बच्चों के जन्म को “संकीर्ण नजरिए” से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि समाज को इस विषय पर खुलकर और व्यापक सोच के साथ विचार करना चाहिए, न कि केवल संख्या के आधार पर चिंता करनी चाहिए।
मांझी ने यह भी कहा कि हर बच्चा अपने साथ संभावनाओं की एक नई दुनिया लेकर आता है। यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि कौन सा बच्चा आगे चलकर देश या समाज के लिए क्या योगदान देगा। ऐसे में केवल जनसंख्या बढ़ने के डर से बच्चों को सीमित करने की सोच सही नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बढ़ती आबादी के साथ सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। मांझी के अनुसार, अगर देश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बेहतर व्यवस्था हो, तो बड़ी आबादी भी एक ताकत बन सकती है, न कि बोझ। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली मुद्दा जनसंख्या नहीं, बल्कि संसाधनों का सही प्रबंधन और लोगों को अवसर उपलब्ध कराना है।
क्यों बढ़ा विवाद?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने चार बच्चों की सलाह देकर बहस छेड़ी
बयान को लेकर राजनीतिक दलों और समाज के अलग-अलग वर्गों में मतभेद सामने आए
अब मांझी के “संकीर्ण सोच न रखें” वाले बयान ने चर्चा को और गहरा कर दिया
कुल मिलाकर, यह विवाद अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। यह जनसंख्या, संसाधन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सरकारी जिम्मेदारियों जैसे बड़े मुद्दों को सामने ला रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।
