प्रेग्नेंसी के दौरान मां और बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इस समय डॉक्टर समय-समय पर कई जांच कराने की सलाह देते हैं ताकि किसी भी खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि एक बेहद जरूरी जांच ऐसी भी है जिसे कई महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं। यह जांच सिर्फ 2 मिनट में हो जाती है और मां व बच्चे दोनों की जान बचाने में मदद कर सकती है। यह जांच है ब्लड प्रेशर यानी बीपी टेस्ट।

डॉक्टरों के अनुसार प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना किसी लक्षण के बढ़ने लगता है। शुरुआत में महिला को कोई दर्द, कमजोरी या परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन अंदर ही अंदर यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। अगर समय रहते इसका पता न चले तो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और प्रीक्लेम्पसिया जैसी समस्याएं दुनियाभर में माताओं की मौत के बड़े कारणों में शामिल हैं। प्रीक्लेम्पसिया एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इससे शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं और बच्चे की सेहत पर भी असर पड़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इसलिए हर गर्भवती महिला को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करानी चाहिए, चाहे वह खुद को पूरी तरह स्वस्थ ही क्यों न महसूस कर रही हो। यह टेस्ट बहुत आसान होता है और सिर्फ दो मिनट में पूरा हो जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस जांच में महिला का सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर मापा जाता है। इसके लिए डिजिटल या सामान्य बीपी मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। महिला को आराम से बैठाकर उसका बीपी चेक किया जाता है। इस जांच से पता चलता है कि शरीर प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले बदलावों को सही तरीके से संभाल पा रहा है या नहीं।


कुछ मामलों में डॉक्टर एक खास टेस्ट भी करते हैं जिसे रोल-ओवर टेस्ट कहा जाता है। यह जांच आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 28वें से 32वें हफ्ते के बीच की जाती है। इस टेस्ट में महिला को पहले बाईं करवट लेटाया जाता है और फिर पीठ के बल लिटाया जाता है। इसके बाद ब्लड प्रेशर मापा जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार अगर इस दौरान डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी नीचे वाला बीपी 20 mmHg या उससे ज्यादा बढ़ जाए तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि महिला को आगे चलकर प्रीक्लेम्पसिया की समस्या हो सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर की स्थिति बदलने से खून के बहाव में थोड़ा बदलाव आता है। जिन महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया का खतरा होता है, उनके शरीर की रक्त वाहिकाएं इस बदलाव पर असामान्य प्रतिक्रिया देती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते हाई ब्लड प्रेशर का पता चल जाए तो दवाइयों, सही खानपान और नियमित निगरानी से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे समय से पहले डिलीवरी, बच्चे के कम वजन या मां की गंभीर तबीयत खराब होने जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।