देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब का बजट बिगाड़ रखा है। हर महीने तेल के दाम बढ़ने की चर्चा होती है और लोगों की नजर सरकार के फैसलों पर टिक जाती है। इसी बीच एक सवाल लगातार उठता है कि अगर पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में ला दिया जाए, तो क्या तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है? कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा होने पर लोगों को प्रति लीटर 25 से 30 रुपये तक की राहत मिल सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा कैलकुलेशन और इसके पीछे का पूरा गणित।
फिलहाल पेट्रोल-डीजल पर कैसे लगता है भारी टैक्स?
अभी पेट्रोल और डीजल GST के दायरे से बाहर हैं। इन पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि राज्य सरकारें अपने हिसाब से VAT यानी वैट वसूलती हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में तेल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं। कई बार पेट्रोल की असली कीमत से ज्यादा रकम टैक्स के रूप में जुड़ जाती है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी शहर में पेट्रोल की बेस कीमत 55 रुपये है, तो उस पर केंद्र और राज्य के टैक्स जुड़ने के बाद कीमत 100 रुपये के करीब पहुंच जाती है। यानी ग्राहक जो रकम भर रहा है, उसका बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। यही कारण है कि GST लागू होने की मांग लंबे समय से उठ रही है।
अगर 28% GST लागू हुआ तो कितना सस्ता होगा तेल?
मान लीजिए पेट्रोल की बेस कीमत 55 रुपये प्रति लीटर है। अगर इस पर सबसे ऊंचा 28% GST भी लगाया जाए, तो टैक्स करीब 15 रुपये के आसपास बनेगा। ऐसे में पेट्रोल की कीमत लगभग 70 से 72 रुपये प्रति लीटर तक आ सकती है।
यानी मौजूदा कीमतों के मुकाबले सीधे 25 से 30 रुपये तक की राहत मिल सकती है। डीजल में भी इसी तरह बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे सिर्फ वाहन चालकों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट लागत कम होने से रोजमर्रा की चीजें भी सस्ती हो सकती हैं।
GST में लाने से सरकारों को क्यों हो सकता है नुकसान?
पेट्रोल और डीजल सरकारों की कमाई का बहुत बड़ा जरिया हैं। केंद्र और राज्य दोनों को तेल पर लगने वाले टैक्स से हर साल लाखों करोड़ रुपये की आय होती है। अगर इन्हें GST में शामिल कर दिया जाता है, तो राज्यों की वैट से होने वाली कमाई काफी घट सकती है।
यही वजह है कि कई राज्य सरकारें इस फैसले को लेकर पूरी तरह तैयार नजर नहीं आतीं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स शेयरिंग को लेकर मजबूत सहमति नहीं बनती, तब तक पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाना आसान नहीं होगा।
आम लोगों और महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?
अगर पेट्रोल और डीजल सस्ते होते हैं, तो इसका असर पूरे बाजार पर दिखाई देगा। ट्रकों और माल ढुलाई का खर्च कम होगा, जिससे फल-सब्जियां, दूध, राशन और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों में राहत मिल सकती है। यानी तेल की कीमत घटने से सीधे महंगाई पर असर पड़ेगा।
इसके अलावा टैक्सी, बस और ऑनलाइन डिलीवरी जैसी सेवाओं की लागत भी कम हो सकती है। ऐसे में आम आदमी को कई स्तर पर फायदा मिलेगा। हालांकि फिलहाल पेट्रोल-डीजल को GST में शामिल करने को लेकर कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ है, लेकिन यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।
