3 मई की परीक्षा खत्म होते ही सोशल मीडिया और छात्रों के व्हाट्सऐप ग्रुप में एक ही बात घूमने लगी टीचर ने जो टिक करके बताया था, वही सवाल पेपर में आ गया!मामला एक ऐसी कॉपी से शुरू हुआ, जिसमें पढ़ाते समय टीचर ने कुछ सवालों के आगे लगाया था और बच्चों से कहा था।लिख लो, यही आएगा पेपर में।जैसे ही छात्र परीक्षा देकर बाहर निकले, उन्होंने देखा कि प्रश्नपत्र में वही सवाल मौजूद हैं जिन पर पहले से निशान लगा था। देखते ही देखते कॉपी के स्क्रीनशॉट वायरल होने लगे। अभिभावक, छात्र और यहाँ तक कि कुछ शिक्षकों ने भी इसे लेकर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए।इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि क्या यह महज़ संयोग था या फिर परीक्षा से पहले किसी तरह की इनसाइड जानकारी बाहर आई थी?यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ छात्रों की बातचीत नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर चर्चा बन चुका है।
मामला क्या है?
एक कोचिंग टीचर ने परीक्षा से कुछ दिन पहले क्लास में पढ़ाते समय कहा था।ये सवाल याद कर लो, पेपर में यहीं आएगा।नोट्स में कुछ सवालों पर निशान लगाया गया।छात्रों को इन सवालों को ‘जरूर’ याद करने को कहा गया।3 मई को परीक्षा हुई और कई सवाल हूबहू मैच कर गए।इसी के बाद दावा हुआ कि टीचर को पहले से पेपर का आइडिया था।इस मिलान के बाद छात्रों में चर्चा शुरू हो गई कि यह ‘सटीक भविष्यवाणी’ कैसे हो सकती है।
छात्रों की पहली प्रतिक्रिया इतना सटीक कैसे?
परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते ही कई छात्रों ने कॉपी निकालकर तुलना करनी शुरू की।कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएँ थीं।टीचर ने जो बोला था, वही आया।न सिर्फ टॉपिक, सवाल एकदम वैसा ही था।ये सामान्य गेस जैसा नहीं लग रहा।कई छात्रों ने कॉपी के फोटो और पेपर के फोटो मिलाकर सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया, जिसके बाद यह मामला और तेजी से फैल गया।
सोशल मीडिया पर हलचल
कुछ ही घंटे में यह मामला वायरल हो गया।कई पेरेंट्स ने इसे ‘पेपर लीक जैसा माहौल’ बताया कुछ शिक्षकों ने कहा कि यह गेस पेपर संस्कृति का नतीजा है।
सोशल मीडिया पर #ExamPaper और #3MayExam जैसे टैग दिखने लगे।आम लोगों के बीच बड़ी चर्चा यही रही कि क्या किसी तरह से असली प्रश्न पहले ही बाहर थे?
हड़कंप क्यों मचा?
क्योंकि इस बार सिर्फ पैटर्न या चैप्टर नहीं, बल्कि सवालों का शब्दशः मेल सामने आया।अगर सिर्फ टॉपिक मैच होता, तो इसे अनुभव का अनुमान कहा जा सकता था।लेकिन यहाँ सवालों का क्रम,पूछने का तरीका,और भाषा भी काफी हद तक समान थी।यही वजह है कि मामला गंभीर माना जा रहा है।ऐसी घटनाओं में संस्थान आमतौर पर कहता है कि टीचर ने अनुभव और पैटर्न के आधार पर ये सवाल बताए होंगे।लेकिन यहाँ छात्रों के पास टीचर द्वारा टिक किए पन्नों के फोटो,प्रश्नपत्र के असली सवाल,और दोनों का सटीक मिलान मौजूद है।इस कारण स्पष्टीकरण देना मुश्किल हो रहा है।
संयोग या सिस्टम की खामी?
इस समय पूरा विवाद दो सवालों पर अटका है क्या यह बेहद सटीक ‘गेस’ था?या क्या पेपर का कुछ हिस्सा किसी तरह बाहर आ गया था?इन दोनों में से जो भी सच हो दोनों स्थिति में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
लिख लो, यही आएगा जैसा वाक्य पढ़ाई के दौरान कई टीचर बोलते हैं।लेकिन इस मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई क्योंकि सवाल वही निकले कॉपी में टिक पहले से थे और छात्रों के पास इसका ठोस फोटो प्रमाण थाइसने छात्रों और अभिभावकों दोनों में भरोसे का संकट पैदा किया है।अब जरूरत है कि इस तरह के मामलों की पूरी, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो, ताकि परीक्षा प्रणाली पर से लोगों का भरोसा न हिले और मेहनत करने वाले छात्रों को किसी भी तरह की अनियमितता की कीमत न चुकानी पड़े।
