बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई की तस्वीरों से गर्म हो उठी। शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे, लेकिन उनका प्रदर्शन उस समय हिंसक मोड़ ले गया जब पुलिस ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। जेपी गोलंबर से लेकर गांधी मैदान तक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छात्र-छात्राएं जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कई घायल अभ्यर्थियों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और सरकार की तैयारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

टीआरई-4 की देरी ने बढ़ाया अभ्यर्थियों का गुस्सा
दरअसल बिहार लोक सेवा आयोग की शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों में नाराजगी बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने पहले दावा किया था कि अप्रैल में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी, लेकिन तय तारीख गुजर जाने के बाद भी विज्ञापन जारी नहीं हुआ। बीपीएससी कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा पिछले साल अगस्त में ही हो जानी थी, जबकि परिणाम सितंबर तक आने की बात कही गई थी। इसके बावजूद अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं होने से लाखों अभ्यर्थियों में बेचैनी बढ़ गई है। सबसे बड़ी चिंता उन अभ्यर्थियों की है जिनकी आयु सीमा खत्म होने वाली है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
पटना कॉलेज से निकला मार्च, जेपी गोलंबर पर टकराव
छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में हजारों अभ्यर्थियों ने पटना कॉलेज से विरोध मार्च निकाला। यह मार्च गांधी चौक, मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी और गांधी मैदान होते हुए जेपी गोलंबर तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सरकार तुरंत टीआरई-4 का विज्ञापन जारी करे और भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह का नया बदलाव न किया जाए। लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के आवास की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया। पुलिस ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, जिससे कई छात्र और छात्राएं घायल हो गए।

पीटी-मेंस प्रणाली की चर्चा से भी भड़के छात्र
अभ्यर्थियों का गुस्सा सिर्फ विज्ञापन में देरी को लेकर नहीं है। हाल के दिनों में यह चर्चा भी तेज हुई है कि अब शिक्षक भर्ती परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा की नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। छात्रों का कहना है कि अब तक एक ही परीक्षा के जरिए नियुक्ति होती रही है, फिर अचानक नई व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ गई। हालांकि सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस आशंका ने भी अभ्यर्थियों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी के बाद और गरमाया माहौल
लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने छात्र नेता दिलीप कुमार को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गया। हजारों अभ्यर्थी देर शाम तक जेपी गोलंबर के पास डटे रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। स्थिति को संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी, रिजर्व फोर्स और वाटर कैनन तैनात किए गए। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की, जबकि छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को जबरन दबाया गया।

चुनाव से पहले सरकार पर बढ़ा दबाव
टीआरई-4 के तहत राज्य में करीब 46 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती होनी है। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने बड़ी संख्या में बहाली का वादा किया था, लेकिन अब प्रक्रिया में हो रही देरी सरकार के लिए राजनीतिक मुश्किल बनती जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह छात्र आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। बिहार में बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में देरी पहले से बड़ा मुद्दा रहे हैं, ऐसे में पटना की सड़कों पर उमड़ा यह गुस्सा आने वाले दिनों में सरकार की चिंता और बढ़ा सकता है।
