आजकल लोगों के बीच हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। खासकर खाने-पीने की आदतों में बदलाव साफ देखने को मिल रहा है। इसी बीच “जीरो ऑयल कुकिंग” यानी बिना तेल के खाना बनाने का तरीका काफी लोकप्रिय हो रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी लोगों से खाने में तेल का इस्तेमाल कम करने की अपील की थी। उनका कहना था कि अगर हर परिवार थोड़ा भी तेल कम इस्तेमाल करे तो इससे सेहत के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो सकता है।


अब लोग इस बात को समझने लगे हैं कि स्वादिष्ट खाना बनाने के लिए हर बार ज्यादा तेल जरूरी नहीं होता। सही मसाले, सही तकनीक और ताजे ingredients के साथ बिना तेल के भी बेहतरीन खाना तैयार किया जा सकता है।


क्या होती है जीरो ऑयल कुकिंग?

जीरो ऑयल कुकिंग का मतलब है खाना बनाते समय तेल या घी का इस्तेमाल बिल्कुल न करना। इस तरीके में खाने को उबालकर, स्टीम देकर, ग्रिल करके या नॉन-स्टिक बर्तनों में पकाया जाता है।

इसमें सब्जियां अपने ही पानी और प्राकृतिक रस में पकती हैं, जिससे उनका असली स्वाद बरकरार रहता है। कई लोग शुरुआत में सोचते हैं कि बिना तेल का खाना फीका होगा, लेकिन सही तरीके से पकाया जाए तो इसका स्वाद काफी शानदार हो सकता है।

बिना तेल के स्वाद कैसे बढ़ाया जाता है?

जीरो ऑयल कुकिंग में मसालों और प्राकृतिक फ्लेवर की सबसे बड़ी भूमिका होती है।

अदरक, लहसुन और हरी मिर्च खाने में गहराई वाला स्वाद लाते हैं।

टमाटर और प्याज की ग्रेवी खाने को naturally rich बनाती है।

धनिया, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी और कसूरी मेथी जैसे मसाले स्वाद को बढ़ाते हैं।

नींबू, दही और हर्ब्स का इस्तेमाल खाने को ताजगी देता है।

अगर सब्जियों या पनीर को पहले से मसालों में मैरीनेट कर लिया जाए तो बिना तेल के भी उनका स्वाद काफी बेहतर हो जाता है।


कौन-से तरीके सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं?

स्टीम कुकिंग

भाप में पकाना जीरो ऑयल कुकिंग का सबसे हेल्दी तरीका माना जाता है। इससे खाने का पोषण काफी हद तक सुरक्षित रहता है। इडली, ढोकला, मोमोज, सब्जियां और दालें स्टीम में आसानी से बनाई जा सकती हैं।


उबालकर पकाना

दाल, सूप, ओट्स और कई सब्जियां उबालकर बनाई जाती हैं। इसमें अतिरिक्त फैट नहीं जुड़ता और खाना हल्का रहता है।


नॉन-स्टिक या कास्ट आयरन बर्तन

इन बर्तनों में खाना चिपकता कम है, इसलिए तेल की जरूरत नहीं पड़ती। धीमी आंच पर पकाने से सब्जियां अपने ही moisture में पक जाती हैं।


ग्रिल और रोस्टिंग

पनीर, शकरकंद, मशरूम और दूसरी सब्जियों को ग्रिल करके स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। इससे खाने में smoky flavor भी आता है।

जीरो ऑयल कुकिंग के फायदे

वजन कंट्रोल करने में मदद

तेल में कैलोरी काफी ज्यादा होती है। जब खाने में तेल कम होता है तो extra calories भी कम हो जाती हैं, जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

दिल की सेहत बेहतर रहती है

ज्यादा तला-भुना खाना cholesterol और heart problems का खतरा बढ़ा सकता है। कम तेल वाला खाना दिल के लिए हल्का माना जाता है।

पाचन बेहतर होता है


बिना तेल का खाना पेट पर ज्यादा भारी नहीं पड़ता। इससे गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।

शरीर में हल्कापन महसूस होता है

बहुत ज्यादा oily food खाने के बाद अक्सर आलस और भारीपन महसूस होता है, जबकि हल्का खाना शरीर को ज्यादा energetic महसूस करा सकता है।

क्या पूरी तरह तेल छोड़ देना सही है?

विशेषज्ञों के अनुसार शरीर को थोड़ी मात्रा में healthy fats की जरूरत होती है। इसलिए पूरी तरह तेल बंद करने के बजाय संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर माना जाता है। सरसों, ऑलिव और मूंगफली जैसे healthy oils सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं।

जीरो ऑयल कुकिंग को रोजमर्रा की आदत बनाने से पहले शरीर की जरूरत और डॉक्टर या nutrition expert की सलाह को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

घर में कैसे शुरू करें?

शुरुआत में तेल की मात्रा धीरे-धीरे कम करें।


तली हुई चीजों की जगह स्टीम और उबले विकल्प अपनाएं।

खाने में ज्यादा हरी सब्जियां और दालें शामिल करें।

नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करें।

स्वाद बढ़ाने के लिए मसालों और हर्ब्स का सही उपयोग करें।

बदलती सोच का हिस्सा बन रही है जीरो ऑयल कुकिंग

आज के समय में लोग सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि हेल्थ को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। यही वजह है कि जीरो ऑयल कुकिंग अब सिर्फ एक ट्रेंड नहीं बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनती जा रही है।

छोटे-छोटे बदलाव, जैसे तेल कम करना, ज्यादा स्टीम फूड खाना और ताजे ingredients का इस्तेमाल करना, लंबे समय में शरीर को कई फायदे दे सकते हैं। स्वाद और सेहत के बीच संतुलन बनाकर भी अच्छा खाना खाया जा सकता है, और यही इस नई कुकिंग स्टाइल की सबसे बड़ी खासियत है।