कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएँ अचानक अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं।
ये कोशिकाएँ ट्यूमर बना सकती हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती हैं।सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के रहता है, और जब तक इसका पता चलता है, बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इसी वजह से अर्ली डिटेक्शन यानी जल्दी पहचान को जीवन बचाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी माना जाता है।इसी जल्दी पहचान की दिशा में भारत में एक अनोखा प्रयोग सामने आया है जहाँ इंसानों के स्वास्थ्य का सुराग किसी डॉक्टर ने नहीं, बल्कि ट्रेंड कुत्तों ने सूंघकर दिया है।
मुख्य रिपोर्ट
भारत में कैंसर की जांच को लेकर एक बिल्कुल नई उम्मीद दिखाई दे रही है। कर्नाटक में हुई एक अनोखी स्टडी में यह सामने आया है कि प्रशिक्षित कुत्ते इंसानी सांस में मौजूद बदलावों को सूंघकर शुरुआती स्टेज के कैंसर का पता लगा सकते हैं वो भी 90% से ज़्यादा सटीकता के साथ।हो सकता है आने वाले समय में किसी स्वास्थ्य शिविर में आपसे कहा जाए।10 मिनट तक इस मास्क के अंदर सामान्य सांस लें।क्योंकि उस मास्क को एक ऐसी जांच के लिए भेजा जाएगा, जिसमें कैंसर की गंध को एक कुत्ता पहचान कर देगा।
कुत्ता कैंसर कैसे पहचानता है?
सांस के साथ शरीर से बहुत मामूली वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs)निकलते हैं।कैंसर होने पर इनकी संरचना और गंध बदल जाती है।इंसान इन बदलावों को महसूस नहीं कर सकता मशीनें कई बार इन्हें पकड़ नहीं पाती लेकिन कुत्तों की नाक में 30 करोड़ गंध-संवेदक सेल होते हैं (इंसानों में केवल 50 लाख)इसी वजह से वे शुरुआती स्टेज के कैंसर को भी पहचान लेते हैं।
भारत की पहली बड़ी स्टडी 1502 मरीज, 91% सटीकता
बेंगलुरु की स्टार्टअप डॉगनोसिस ने यह स्टडी कर्नाटक के छह अस्पतालों में की।नतीजे कुल सैंपल 1502 इनमें से 283 सैंपल कैंसर पॉज़िटिव कुत्तों ने 7 बड़े प्रकार के कैंसर 91% एक्यूरेसी से पहचान लिए स्टडी के प्रमुख डॉ. संजीव कुलकोड के अनुसार,शुरुआती पहचान से मरीज की जान बचाना कई गुना आसान हो जाता है। कुत्तों ने हमें एक नई दिशा दिखाई है।
डॉगनोसिस की योजना 10 लाख लोगों की जांच हर साल
डॉगनोसिस के CEO आकाश कुलकोड का कहना है अब तक 10,000 सैंपल कलेक्ट हो चुके हैं
अगला चरण महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लक्ष्य 30 प्रशिक्षित कुत्तों की मदद से हर साल 10 लाख जांच AI + कुत्तों की सूंघने की क्षमता = एक व्यापक जांच प्रणाली
दुनिया में यह तकनीक पहले से चल रही है
इज़राइल, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ताइवान, जापान समेत कई देशों में कुत्तों की सूंघने की क्षमता से कैंसर जांच पर लंबे समय से काम हो रहा है।
इज़राइल की 2024 स्टडी में पाया गया किसांस का सैंपल यूरिन के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से कैंसर की पहचान करता है।AI मॉडल के साथ यह परिणाम और सटीक हो सकता है
केरल के ‘हीरो डॉग्स’ ने दिखाया कमाल
2024 में वायनाड लैंडस्लाइड में माया
मर्फी,एंजल ने सिर्फ 3 दिनों में 23 शव खोज निकाले।उन्हीं की नाक का इस्तेमाल अब मेडिकल ट्रेनिंग में किया जा रहा है।
कौन-सी नस्लें सबसे कारगर?
स्टडी में कई नस्लों को शामिल किया गया देसी (इंडी) ,बीगल ,लैब्राडोर बेल्जियन मेलिनोइस,डच शेफर्ड मिक्स ट्रेनिंग 10 हफ्ते से अधिक चली और रिवॉर्ड-बेस्ड थी।
कैंसर जांच का भविष्य सांस आधारित स्क्रीनिंग
विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना दर्द,बिना रेडिएशन,बिना महंगे स्कैन सिर्फ 10 मिनट की सांस लेकर शुरुआती स्तर पर कैंसर पकड़ना भारत जैसे देश में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
HCG कैंसर सेंटर के डॉ. विशाल राव का सुझाव है कि देश को अब कुत्तों जैसी Artificial Nose विकसित करनी चाहिए ताकि VOCs को बड़े पैमाने पर पहचाना जा सके।
