दुनिया में किसी देश की ताकत अब सिर्फ उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों को मिलने वाली वैश्विक पहुंच से भी तय होती है। इसी का एक बड़ा पैमाना है हेनली पासपोर्ट सूचकांक, जिसकी 2026 की रिपोर्ट में भारत को लेकर एक दिलचस्प और थोड़ा उलझा हुआ सच सामने आया है।

इस बार भारत की स्थिति सुधरी है और वह 85वें स्थान से ऊपर चढ़कर 80वें स्थान पर पहुंच गया है। पहली नजर में यह एक अच्छी खबर लगती है, लेकिन जब पूरे आंकड़ों को देखा जाए तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। असल में, जहां स्थान में सुधार हुआ है, वहीं भारतीय पासपोर्ट से मिलने वाली बिना वीजा या पहुंचने पर वीजा मिलने की सुविधा वाले देशों की संख्या 57 से घटकर 55 हो गई है। यानी स्थान ऊपर गया, लेकिन यात्रा की सुविधा थोड़ी कम हो गई- यहीं से असली सवाल उठता है कि ताकत किसे माना जाए?
भारत की स्थिति: सुधार के साथ सवाल
भारत का 80वें स्थान पर पहुंचना यह जरूर दिखाता है कि स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं है। लेकिन अगर गहराई से देखा जाए, तो सुधार बहुत तेज नहीं है। भारतीय नागरिक अभी 55 देशों में बिना पहले से अनुमति लिए यात्रा कर सकते हैं या वहां पहुंचकर अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। इनमें ज्यादातर छोटे या विकासशील देश शामिल हैं, जबकि विकसित देशों में अब भी प्रक्रिया कठिन बनी हुई है। यानी सवाल यह है- क्या यह सुधार आम लोगों के लिए वास्तव में फायदेमंद है?

दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट: एशिया आगे
अगर दुनिया पर नजर डालें, तो सिंगापुर का पासपोर्ट सबसे मजबूत है। वहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद जापान और दक्षिण कोरिया दूसरे स्थान पर हैं, जहां के नागरिक 188 देशों में बिना वीजा जा सकते हैं। यह साफ दिखाता है कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंध किसी देश के नागरिकों को कितनी बड़ी सुविधा दे सकते हैं।
यूरोप की मजबूत स्थिति
तीसरे स्थान पर डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, स्पेन और लक्ज़मबर्ग जैसे देश हैं, जहां के नागरिक 186 देशों में बिना वीजा जा सकते हैं! यह बताता है कि आर्थिक मजबूती और भरोसेमंद नीतियां पासपोर्ट की ताकत को बढ़ाती हैं।
संयुक्त अरब अमीरात की बड़ी छलांग
संयुक्त अरब अमीरात ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया है और शीर्ष 5 देशों में जगह बना ली है। पिछले 20 वर्षों में उसने 149 देशों में बिना वीजा पहुंच हासिल की है और अपनी स्थिति में 50 से ज्यादा स्थानों का सुधार किया है।
सूची कैसे बनती है?
यह सूची अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ के आंकड़ों के आधार पर तैयार होती है। इसमें 199 देशों के पासपोर्ट और 227 देशों व क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है। यह देखा जाता है कि किसी देश का नागरिक कितने देशों में बिना वीजा या आसान प्रक्रिया के प्रवेश कर सकता है।

भारत के लिए संकेत क्या है?
भारत की स्थिति में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यात्रा की सुविधा में आई कमी यह दिखाती है कि अभी और काम करने की जरूरत है। यह साफ संकेत है कि भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और समझौतों को और मजबूत करना होगा, ताकि आम नागरिक को ज्यादा लाभ मिल सके।
आज के समय में पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि यह तय करता है कि दुनिया आपके लिए कितनी खुली है।
