दुनिया भर में करोड़ों महिलाएं हर महीने ऐसे दर्द से गुजरती हैं, जिसे अक्सर “सामान्य पीरियड क्रैम्प” कहकर टाल दिया जाता है।कई महिलाएं अपनी पीड़ा को बताती भी नहीं क्योंकि समाज ने उन्हें सिखाया है कि मासिक धर्म का दर्द झेलना पड़ता है।लेकिन चिकित्सा विज्ञान अब इस चुप्पी और अनदेखी पर सवाल उठा रहा है और जवाब तलाश रहा है उस चीज़ में जिसे सदियों तक बस एक ‘अबॉर्शन फ्लूइड’ समझकर नजरअंदाज़ किया गया पीरियड का रक्त।वैज्ञानिकों का मानना है कि यह साधारण रक्त नहीं, बल्कि महिला शरीर का एक मासिक बायोलॉजिकल रिपोर्ट कार्ड है जो एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी के रहस्यों को खोल सकता है, एक ऐसी बीमारी जो 19 करोड़ महिलाओं को प्रभावित करती है और जिसका निदान कई बार 10–12 साल तक टल जाता है।

अब शोध एक नई दिशा में बढ़ रहा है पीरियड ब्लड के भीतर छिपे माइक्रोस्कोपिक सुरागों की तरफ़।

और इसी खोज ने महिलाओं के स्वास्थ्य विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत कर दी है।


पीरियड ब्लड: वैज्ञानिकों के लिए नई ‘क्लिनिकल विंडो’

अमेरिका की 27 वर्षीय एमा बैकलुंड उन लाखों महिलाओं में से एक हैं जिन्हें किशोरावस्था से ही असहनीय दर्द झेलना पड़ा। उन्हें भी सालों बाद पता चला वह एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित हैं।2023 में कैलिफ़ोर्निया के ओकलैंड की बायोटेक कंपनी नेक्स्टजेन जेन ने उनसे उनके पीरियड ब्लड के नमूनों की मांग की। एमा ने मदद के रूप में अपने पूरे साइकिल के आठ टैम्पोन भेज दिए एक उम्मीद के साथ कि शायद यह शोध भविष्य की लड़कियों की ज़िंदगी आसान बना सके।इतिहास में डॉक्टर्स ने मूत्र, रक्त और ऊतकों की जांच की, पर पीरियड के रक्त को चिकित्सा विज्ञान ने कभी गंभीरता से नहीं परखा।जबकि यह साधारण रक्त से कहीं अधिक जटिल होता है इसमें हार्मोन, बैक्टीरिया, एंडोमेट्रियल टिश्यू, प्रोटीन और प्रजनन तंत्र की कोशिकाएं शामिल होती हैं।नेक्स्टजेन जेन की CEO रिधि तारियाल कहती हैं पीरियड ब्लड एक प्राकृतिक बायोप्सी जैसा है ऐसी जानकारी देता है जो खून या लार में नहीं मिलती।


एंडोमेट्रियोसिस के ‘बायोलॉजिकल संकेत’क्या मिल गया सुराग?

नॉर्थवेल हेल्थ की क्रिस्टीन मेट्ज़ की 3,700 महिलाओं की स्टडी में कई महत्वपूर्ण संकेत मिले एंडोमेट्रियोसिस मरीजों में नेचुरल किलर सेल्स कम

सूजन (inflammation) के मार्कर्स ज्यादा जीन अभिव्यक्ति बदलती हुई

स्ट्रोमल फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं में कार्य क्षमता की कमी इन सभी को जोड़कर वैज्ञानिक एक ऐसा टेस्ट बनाने की कोशिश में हैं जो बिना सर्जरी के सिर्फ पीरियड ब्लड से एंडोमेट्रियोसिस का निदान कर सके।

मेट्ज़ का लक्ष्य है कि 2027 तक एक होम-टेस्ट को FDA की मंज़ूरी मिल जाए।


स्टार्टअप्स की दौड़: पीरियड ब्लड को मेडिकल डेटा में बदलना

नेक्स्टजेन जेन MRNA की सीक्वेंसिंग कर बायोमार्कर्स खोज रहा है।इसके अलावा थाईलैंड और अमेरिका की स्टडी में क्यूविन (Qvin) ने पीरियड ब्लड से ब्लड शुगर HPV थायरॉयड जानकारी निकालने में सफलता पाई है।बर्लिन की The Blood कंपनी मेनोपॉज़, PCOS और प्रजनन रोगों की पहचान पर काम कर रही है।


पीरियड ब्लड: सिर्फ़ प्रजनन नहीं सम्पूर्ण स्वास्थ्य की झलक

शोध यह भी दिखाता है कि यह द्रव

ऑटोइम्यून बीमारियों मेटाबॉलिक विकारों इम्यून रेस्पॉन्स पर भी महत्वपूर्ण डेटा दे सकता है।कई वैज्ञानिक मानते हैं कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य की शोध में भविष्य की सबसे बड़ी क्रांति हो सकती है।


तो इतनी देर क्यों लगी?

कारण स्पष्ट हैं मासिक धर्म के आसपास सांस्कृतिक टैबू मेडिकल रिसर्च में पुरुष-केंद्रित मॉडलिंग

महिलाओं के स्वास्थ्य पर केवल 5% ग्लोबल रिसर्च फंडिंग क्यूविन के मैड्स लिलेलुंड का दर्द भरा बयान इसे और स्पष्ट करता है।एंडोमेट्रियोसिस की तुलना में पुरुषों के गंजेपन पर ज़्यादा पैसा खर्च होता है।


आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद

एमा बैकलुंड कहती हैंहर महीने उस दर्द से लड़ते हुए खुद को ही दोष देना यह बेहद अकेला अनुभव था।अगर वैज्ञानिक सफल होते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों की लड़कियां वर्षों की देरी से नहीं, बल्कि कुछ दिनों में अपना निदान पा सकेंगी और समय रहते इलाज भी।