कोविड -19 महामारी के बाद दुनिया को लगा था कि अब भविष्य में आने वाली महामारियों से निपटने की तैयारी पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी होगी, लेकिन एक नई ग्लोबल रिपोर्ट ने फिर चिंता बढ़ा दी है। मिडिल अफ्रीका के कई हिस्सों में इबोला के नए प्रकोप और हंतावायरस, मंकीपॉक्स व बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया अगली महामारी के लिए पहले से ज्यादा कमजोर होती जा रही है।
दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा है संक्रमण का खतरा
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और वर्ल्ड बैंक के समर्थन से बने स्वतंत्र संगठन ग्लोबल प्रिपेयर्डनेस मॉनिटरिंग बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, संक्रामक बीमारियों का खतरा अब पहले की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दस वर्षों के मुकाबले अब कई देशों और उनकी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की महामारी से उबरने की क्षमता कमजोर हुई है।
यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला के नए प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। इस बार इबोला का कम समझा जाने वाला बुंडिबुग्यो स्ट्रेन सामने आया है, जिसने विशेषज्ञों की चिंता और बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ रहा है संक्रमण का खतरा?
79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के दौरान जारी रिपोर्ट “ए वर्ल्ड ऑन द एज: प्रायोरिटीज फॉर ए पैंडेमिक-रेजिलिएंट फ्यूचर” में कहा गया है कि महामारी से निपटने की तैयारियों पर हुआ निवेश तेजी से बढ़ते खतरों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पर्यावरणीय गड़बड़ियां, बढ़ती वैश्विक आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय विकास फंडिंग में कमी जैसी वजहें वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को कमजोर कर रही हैं।
रिपोर्ट में किन बातों पर जताई गई चिंता?
रिपोर्ट में 2014-16 और 2019-20 के इबोला प्रकोप, कोविड-19 और मंकीपॉक्स जैसी बड़ी स्वास्थ्य आपात स्थितियों की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि कोविड के बाद नई स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और योजनाएं तो बनाई गईं, लेकिन महामारी से निपटने की वैश्विक क्षमता अब भी असमान बनी हुई है।
सबसे ज्यादा चिंता वैक्सीन और दवाओं की समान पहुंच को लेकर जताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, मंकीपॉक्स की वैक्सीन गरीब देशों तक पहुंचने में लगभग दो साल लग गए, जो कोविड वैक्सीन से भी ज्यादा देरी थी। बोर्ड ने चेतावनी दी कि दुनिया वैक्सीन, जांच और इलाज की समान उपलब्धता के मामले में पीछे की ओर बढ़ रही है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी पड़ रहा असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महामारी अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं और लोगों के भरोसे पर भी पड़ रहा है। कोविड और इबोला दोनों के दौरान राजनीतिक ध्रुवीकरण, वैज्ञानिक संस्थाओं पर हमले और गलत सूचनाओं का तेजी से प्रसार देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, इनका असर महामारी खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
भारत के लिए भी यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया के सबसे बड़े कोविड प्रकोपों में से एक झेल चुके भारत में घनी आबादी, तेजी से बढ़ते शहर और बड़े पैमाने पर होने वाला आंतरिक पलायन भविष्य की महामारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि देश में बीमारी निगरानी व्यवस्था, ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा और इमरजेंसी फंडिंग सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है।
अस्वीकरण: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई स्वास्थ्य गतिविधि या उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
