हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के विश्लेषण में एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस पार्टी के कई विजेता उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से हैं। यह स्थिति खास तौर पर असम, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में देखने को मिली है। इस ट्रेंड ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है।
सबसे पहले बात करें असम की, तो यहां कांग्रेस के प्रदर्शन में एक खास पैटर्न दिखाई दिया। कांग्रेस ने कुल 99 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से 20 मुस्लिम उम्मीदवार थे। इन 20 में से 18 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। यानी कांग्रेस के 19 विजयी उम्मीदवारों में से 18 मुस्लिम हैं और केवल एक गैर-मुस्लिम उम्मीदवार जीत सका। यह आंकड़ा दिखाता है कि मुस्लिम उम्मीदवारों का जीत प्रतिशत काफी ज्यादा रहा।
केरल में भी कुछ ऐसा ही रुझान देखने को मिला। केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं, जिनमें से 35 सीटों पर मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इनमें से 30 विधायक कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) गठबंधन से हैं। कांग्रेस के अपने 8 मुस्लिम विधायक जीते हैं, जबकि उसके सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 22 विधायक भी मुस्लिम समुदाय से हैं। इससे साफ है कि केरल में कांग्रेस गठबंधन को मुस्लिम समुदाय का अच्छा समर्थन मिला।
अब पश्चिम बंगाल की बात करें, तो यहां कांग्रेस को केवल दो सीटें मिलीं, लेकिन खास बात यह है कि दोनों सीटों पर जीतने वाले उम्मीदवार मुस्लिम हैं। इसके अलावा, कांग्रेस ने यहां 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से भी ज्यादा है। टीएमसी ने 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। हालांकि, कुल नतीजों में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 206 सीटें हासिल कीं और सरकार बनाई।
तमिलनाडु में कांग्रेस ने दो मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनमें से एक उम्मीदवार जीतने में सफल रहा। यहां भी मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रदर्शन ध्यान देने योग्य रहा।
विश्लेषकों के मुताबिक, असम और केरल में कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा उतारे गए मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का प्रतिशत करीब 80 फीसदी रहा। यह आंकड़ा बताता है कि जहां-जहां पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया, वहां उनकी जीत की संभावना अधिक रही।
हालांकि, दूसरी ओर कुछ राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर भी रहा है। उदाहरण के लिए, असम में एनडीए गठबंधन ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की ओर बढ़त बनाई और 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीत लीं। इसी तरह, पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया।
तमिलनाडु में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया और बड़ी पार्टियों को कड़ी टक्कर दी। वहीं, केरल में कांग्रेस ने 10 साल बाद सत्ता में वापसी की, जिससे वहां राजनीतिक बदलाव देखने को मिला।
