दक्षिण भारतीय सिनेमा और राजनीति का रिश्ता हमेशा से बेहद गहरा रहा है। यहां फिल्मों के सुपरस्टार्स सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जनता के दिलों में उनकी ऐसी छवि बनती है कि वही लोकप्रियता उन्हें राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंचा देती है। हाल के समय में Thalapathy Vijay के राजनीति में कदम रखने और अपनी पार्टी ‘Tamilaga Vettri Kazhagam’ के जरिए मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि आखिर साउथ के सितारे राजनीति में इतने सफल क्यों होते हैं।

हालांकि विजय इस रास्ते पर चलने वाले पहले स्टार नहीं हैं। उनसे पहले भी कई दिग्गज अभिनेता राजनीति में उतरकर सत्ता के शीर्ष पदों तक पहुंचे और अपनी अलग पहचान बनाई।

तमिल सिनेमा के महानायक M. G. Ramachandran इस परंपरा के सबसे बड़े उदाहरण माने जाते हैं। फिल्मों में गरीबों के मसीहा की उनकी छवि इतनी मजबूत थी कि जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा तो जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बिठा लिया। उन्होंने AIADMK पार्टी की स्थापना की और 1977 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे लगातार सत्ता में बने रहे और अपनी लोकप्रियता को जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए और मजबूत किया।

उनके बाद J. Jayalalithaa ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। एक सफल अभिनेत्री से राजनीति की ताकतवर नेता बनीं जयललिता को लोग ‘अम्मा’ के नाम से जानते थे। उन्होंने कई बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनकर यह साबित किया कि फिल्मी दुनिया से निकली महिला नेता भी राजनीति में मजबूत पकड़ बना सकती है।

आंध्र प्रदेश में N. T. Rama Rao का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। तेलुगु फिल्मों में भगवान जैसे किरदार निभाने वाले एनटीआर ने जब राजनीति में कदम रखा तो लोगों ने उन्हें उसी आस्था के साथ स्वीकार किया। उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की और बहुत कम समय में मुख्यमंत्री बनकर क्षेत्रीय राजनीति को नई दिशा दी।

इसी कड़ी में Chiranjeevi का नाम भी आता है, जिन्होंने अपनी लोकप्रियता के दम पर राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने प्रजा राज्यम पार्टी बनाई और बाद में राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ते हुए केंद्रीय मंत्री भी बने। भले ही उनका राजनीतिक सफर उतना लंबा नहीं रहा, लेकिन उनका प्रभाव जरूर महसूस किया गया।

आज के दौर में Pawan Kalyan एक बड़े उदाहरण के रूप में उभरे हैं। फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने के बाद उन्होंने ‘जन सेना पार्टी’ के जरिए राजनीति में कदम रखा और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में वे आंध्र प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री तक पहुंचे। यह उपलब्धि उन्हें इस सूची में सबसे खास बनाती है।

वहीं Kamal Haasan ने भी ‘मक्कल नीधि मय्यम’ पार्टी बनाकर राजनीति में एक वैकल्पिक सोच पेश करने की कोशिश की है। वे लगातार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं और एक अलग तरह की राजनीति की पैरवी करते हैं।

इन सभी उदाहरणों से साफ है कि दक्षिण भारत में सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा एक मजबूत प्लेटफॉर्म है। यहां के सितारे फिल्मों में जो किरदार निभाते हैं, वही छवि असल जिंदगी में भी उनके साथ चलती है। जनता उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि अपने नेता के रूप में देखने लगती है।

थलापति विजय का राजनीति में उभार इसी लंबे इतिहास की नई कड़ी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे भी MGR और NTR जैसे दिग्गजों की तरह राजनीति में स्थायी और मजबूत पहचान बना पाते हैं, या फिर यह सफर किसी नए मोड़ की ओर जाएगा।