स्मार्टवॉच बनी जिंदगी का हिस्सा, लेकिन बढ़ने लगे सवाल

आज के दौर में स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड सिर्फ फैशन गैजेट नहीं रह गए हैं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और हेल्थ मॉनिटरिंग का हिस्सा बन चुके हैं। हार्ट रेट, नींद, स्टेप काउंट, कैलोरी बर्न और वर्कआउट जैसी कई जानकारियां अब लोगों की कलाई पर ही उपलब्ध रहती हैं। लेकिन जैसे-जैसे इन डिवाइसेज़ का इस्तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे इनके नुकसान को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि स्मार्टवॉच से निकलने वाले रेडियो सिग्नल या ब्लूटूथ रेडिएशन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। इसी वजह से कई लोग इसे लेकर डर और भ्रम में रहते हैं।


क्या स्मार्टवॉच का रेडिएशन खतरनाक होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड बहुत कम ताकत वाले ब्लूटूथ और वायरलेस सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं। यह non-ionising radiation की श्रेणी में आता है, जो उस तरह की खतरनाक रेडिएशन नहीं मानी जाती जो DNA को नुकसान पहुंचाकर कैंसर पैदा कर सके। वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, स्मार्टवॉच से निकलने वाला रेडियो सिग्नल मोबाइल फोन की तुलना में भी काफी कम होता है और यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के भीतर रहता है। अब तक ऐसी कोई ठोस वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे यह साबित हो कि स्मार्टवॉच पहनने से सीधे कैंसर होता है।


फिर PFAS और ‘Forever Chemicals’ को लेकर क्यों हो रही चर्चा?

हाल के समय में स्मार्टवॉच को लेकर एक नई बहस सामने आई है, जो डिवाइस के रेडिएशन से नहीं बल्कि उसके स्ट्रैप में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स से जुड़ी है। कुछ रिसर्च में बताया गया कि कई स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड स्ट्रैप में fluoroelastomers नामक सिंथेटिक रबर का उपयोग होता है, जिसमें PFAS जैसे केमिकल मौजूद हो सकते हैं। इन्हें “Forever Chemicals” कहा जाता है क्योंकि ये पर्यावरण में आसानी से खत्म नहीं होते। कुछ शोधों में लंबे समय तक अधिक मात्रा में PFAS के संपर्क को स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है, हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ कि स्मार्टवॉच पहनने से सीधे कैंसर का खतरा बढ़ता है।


स्मार्टवॉच से जुड़ी असली समस्याएं क्या हैं?

डॉक्टरों के अनुसार, स्मार्टवॉच से सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समस्याएं कैंसर नहीं बल्कि त्वचा से जुड़ी होती हैं। लंबे समय तक टाइट स्ट्रैप पहनने से कई लोगों को खुजली, रैश, एलर्जी या त्वचा पर दबाव के निशान जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्मार्टवॉच को बहुत ज्यादा टाइट न पहनें, समय-समय पर स्ट्रैप साफ करते रहें और अगर त्वचा में जलन हो तो कुछ समय के लिए डिवाइस हटाकर रखें। फिलहाल वैज्ञानिक स्तर पर स्मार्टवॉच को कैंसर का सीधा कारण मानने के पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं।