दिलदारनगर का एसकेबीएम इंटर कॉलेज आज कमसार-ओ-बार क्षेत्र की शान माना जाता है, लेकिन इसका सफ़र बहुत साधारण शुरुआत से शुरू हुआ था। सन 1934 में डिप्टी मोहम्मद सईद ख़ान ने दिलदारनगर में एक छोटे से स्कूल की नींव रखी। उस समय पढ़ाई की सुविधाएँ बेहद कम थीं और आसपास के गाँवों के बच्चों को शिक्षा के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी। सईद ख़ान ने सोचा कि अगर बच्चों के लिए अपने ही इलाके में एक अच्छा स्कूल बन जाए, तो उनकी ज़िंदगी बेहतर हो सकती है। इसी सोच के साथ मुस्लिम राजपूत हाई स्कूल की शुरुआत हुई, जो कुछ कमरों, कुछ शिक्षकों और सीमित सुविधाओं के साथ शुरू होकर धीरे-धीरे इलाके में शिक्षा की उम्मीद बन गया।
समय के साथ स्कूल का नाम फैलने लगा और 1940 में इसे आधिकारिक रूप से रजिस्टर किया गया। पंजीकरण के बाद स्कूल की विश्वसनीयता बढ़ी और दिलदारनगर के साथ-साथ आसपास के गाँवों से भी बच्चे यहाँ पढ़ने आने लगे। 1955 में गाँधी मेमोरियल इंटर कॉलेज के इसमें मिल जाने से यह संस्थान और विस्तृत हो गया। कमरे बढ़े, शिक्षक बढ़े और छात्रों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ने लगी। स्कूल की पढ़ाई का स्तर और वातावरण नया रूप लेने लगा और यह धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में जाना जाने लगा।
1949 में इस संस्थान को इंटर कॉलेज का दर्जा मिला, जो इसके इतिहास का एक बड़ा कदम था। अब यहाँ 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भी शुरू हो गई। कला, विज्ञान और कॉमर्स—तीनों विषयों की पढ़ाई उपलब्ध हो गई, जिससे बच्चों के विकल्प भी बढ़ गए। 1967 में संस्थापक डिप्टी मोहम्मद सईद ख़ान के निधन के बाद कॉलेज का नाम बदलकर सईद कमसार-ओ-बार मुस्लिम इंटर कॉलेज रखा गया। यह नाम संस्थापक के सम्मान और उनके काम को याद रखने के उद्देश्य से दिया गया था। नाम बदलने के बाद कॉलेज ने पढ़ाई, अनुशासन और परिणाम—तीनों क्षेत्रों में तेज़ी से तरक्की की।
आने वाले वर्षों में एसकेबीएम इंटर कॉलेज पूरे कमसार क्षेत्र का बड़ा शिक्षा केंद्र बन गया। हाईस्कूल और इंटर के रिज़ल्ट हर साल बेहतर आने लगे। खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं ने कॉलेज के माहौल को जीवंत बना दिया। जिले की कई प्रतियोगिताओं में कॉलेज के छात्रों ने प्रथम और द्वितीय स्थान हासिल किए। माता-पिता का भरोसा बढ़ता गया और दूर-दराज़ के गाँवों से भी बच्चे यहाँ पढ़ने आने लगे। यह कॉलेज सिर्फ एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि इलाके की एक पहचान बन गया।
साल 2003 में इस संस्थान के इतिहास में एक बड़ा बदलाव आया, जब इसे डिग्री कॉलेज का दर्जा मिला। इसके बाद बी.ए., बी.एस-सी. और बी.कॉम की पढ़ाई भी यहाँ शुरू हुई। कॉलेज में नए कमरे, पुस्तकालय, लैब और अन्य सुविधाएँ बनाई गईं, जिससे उच्च शिक्षा की राह और आसान हो गई। पहले जहाँ युवा उच्च शिक्षा के लिए शहरों का रुख करते थे, वहीं अब उन्हें अपने कस्बे में ही डिग्री पाने का अवसर मिलने लगा। इससे न सिर्फ छात्रों का समय बचा, बल्कि आर्थिक बोझ भी कम हुआ।
आज एसकेबीएम इंटर कॉलेज गर्व से कह सकता है कि उसने हजारों छात्रों का भविष्य बदला है। यहाँ से पढ़े कई बच्चे आईएएस, आईपीएस, सेना अधिकारी, प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर और बैंक अधिकारी बने हैं। कई छात्र देश-विदेश में काम कर रहे हैं और क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। कॉलेज के शिक्षक, पुरानी पीढ़ियों की मेहनत और संस्थापक की दूरदर्शी सोच ने इस संस्थान को एक ऐसी पहचान दी है, जिस पर न सिर्फ दिलदारनगर बल्कि पूरा कमसार गर्व करता है। डिप्टी सईद ख़ान का लगाया हुआ यह छोटा पौधा आज एक विशाल वृक्ष बन चुका है, जो हर साल नई पीढ़ी को शिक्षा की रोशनी देता आ रहा है।
