भारत की राजनीति में बयान कभी-कभी उतने असरदार नहीं होते, जितना उन पर खड़ा हो जाने वाला तूफ़ान होता है। पिछले कुछ महीनों में ऐसा ही एक विवाद लगातार गर्म रहा राहुल गांधी के उस बयान को लेकर, जिसमें उन्होंने कहा था कि हम अब बीजेपी, आरएसएस और भारतीय राज्य से भी लड़ रहे हैं।यह एक ऐसा वाक्य था जिसने सियासत में नई बहस छेड़ दी। आरोप लगे, पलटवार हुए और अंत में मामला अदालत तक पहुँच गया। और अब, हाई कोर्ट ने इस पर अपना साफ़ फैसला सुना दिया है।
हाई कोर्ट का फैसला FIR की मांग खारिज
1 मई 2026 को जस्टिस विक्रम डी. चौहान की सिंगल बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को खारिज कर दिया।यह याचिका हिंदू शक्ति दल की सिमरन गुप्ता ने दायर की थी। उनका कहना था कि राहुल गांधी का बयान भारतीय राज्य को दुश्मन रूप में पेश करता है और जनभावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
कोर्ट ने माना कि यह बयान FIR के दायरे में नहीं आता।
यह बयान कब दिया गया था?
यह पूरा विवाद उस बयान से जुड़ा है, जो राहुल गांधी ने पिछले साल जनवरी में AICC के नए मुख्यालय के उद्घाटन पर दिया था।उन्होंने कहा था कि कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय राज्य के खिलाफ लड़ रही है, क्योंकि उनके अनुसार ये संस्थाओं पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक असर BJP का कड़ा हमला
राहुल गांधी के बयान ने तुरंत राजनीतिक हलचल पैदा कर दी।
बीजेपी नेताओं ने उन पर देश की संप्रभुता को चोट पहुँचाने का आरोप लगाया।पूर्व भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह बयान कांग्रेस की वास्तविक मानसिकता को दिखाता है।
असम के गुवाहाटी के पान बाजार थाने में भी उनके खिलाफ IPC की धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था। आरोप यह बयान असंतोष फैलाने वाला है।
पहले निचली अदालत ने भी याचिका खारिज की थी
इस विवाद को लेकर संभल की स्थानीय अदालत ने FIR की मांग ठुकराई उसके बाद दायर पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हुई इन्हीं फैसलों के बाद मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा, जहाँ याचिका अंतत खारिज हो गई।
राहुल गांधी की दलील क्या थी?
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा था कि बीजेपी-आरएसएस देश की संस्थाओं को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है।उनके बयान को लेकर उस समय बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था, लेकिन हाई कोर्ट ने अब इसे आपराधिक मामला मानने से इनकार कर दिया है।
