देश में तेजी से बढ़ते इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बीच युवाओं की मानसिक स्थिति को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जेपी यूनिवर्सिटी के हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि बड़ी संख्या में युवा ऑनलाइन दुनिया में खुशी तलाशते-तलाशते मानसिक दबाव, अकेलेपन और लत का शिकार हो रहे हैं।

सर्वे के अनुसार, कई छात्र दिन का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया, गेमिंग और इंटरनेट ब्राउज़िंग में बिताते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई, नींद और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग अब “डिजिटल एडिक्शन” का रूप ले चुका है, जो युवाओं की मानसिक सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

अन्य अध्ययनों के मुताबिक भारत में 20% से 40% कॉलेज छात्र इंटरनेट एडिक्शन के जोखिम में हैं , जबकि करीब 40% युवाओं में सोशल मीडिया से जुड़ी लत के लक्षण देखे गए हैं । इसके चलते चिंता, डिप्रेशन, नींद की कमी और आत्मविश्वास में गिरावट जैसे प्रभाव तेजी से बढ़ रहे हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में ऑनलाइन वैलिडेशन की चाह, लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़, और दूसरों से तुलना की आदत इस समस्या को और बढ़ा रही है। परिवार और सामाजिक जुड़ाव की कमी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि डिजिटल डिटॉक्स, सीमित स्क्रीन टाइम और परिवार के साथ समय बिताने जैसी आदतें अपनाकर इस समस्या को कम किया जा सकता है।

यह सर्वे साफ संकेत देता है कि इंटरनेट जहां एक ओर सुविधा और अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर इसकी अंधाधुंध लत युवाओं को अंदर ही अंदर कमजोर कर रही है।