साल 2010 में स्पेन के गैलिशिया क्षेत्र की रहने वाली एंजेलस दूरन नाम की महिला ने एक ऐसा दावा किया, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने स्थानीय नोटरी के माध्यम से एक दस्तावेज तैयार करवाकर खुद को सूरज की “मालकिन” घोषित कर दिया। इस दस्तावेज में सूरज को G2 प्रकार का तारा बताते हुए उसकी दूरी और वैज्ञानिक विवरण भी शामिल किया गया। उनका कहना था कि उन्होंने कानूनी प्रक्रिया अपनाकर सूरज पर अपना अधिकार स्थापित किया है।
Sun Tax का प्लान और बड़ा दावा
रजिस्ट्री के बाद एंजेलस दूरन ने घोषणा की कि अब सूरज की रोशनी का उपयोग करने वाले लोगों से टैक्स वसूला जाएगा। उन्होंने एक योजना भी बनाई थी, जिसके तहत टैक्स से मिलने वाले पैसे का हिस्सा सरकार, पेंशन फंड, रिसर्च और विश्व भूख मिटाने जैसे कार्यों में खर्च किया जाएगा, जबकि कुछ हिस्सा वे खुद रखतीं। उनका तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय कानून देशों को तो आकाशीय पिंडों पर दावा करने से रोकता है, लेकिन व्यक्तियों पर यह नियम लागू नहीं होता।
कानून ने क्यों नहीं माना दावा
हालांकि, उनका यह दावा ज्यादा समय तक टिक नहीं सका। अंतरिक्ष कानून, खासकर 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी के अनुसार, कोई भी देश या संस्था किसी आकाशीय पिंड पर स्वामित्व नहीं जता सकती। कानूनी विशेषज्ञों ने साफ किया कि यह नियम अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्तियों पर भी लागू होता है, इसलिए एंजेलस दूरन का दावा वैध नहीं माना गया और इसे खारिज कर दिया गया।
‘सूरज की जमीन’ बेचने तक पहुंची बात
दावा खारिज होने के बाद भी एंजेलस दूरन ने अपने प्रयास नहीं रोके। साल 2015 में उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म eBay पर “सूरज की जमीन” के प्लॉट बेचने शुरू कर दिए, जहां एक वर्ग मीटर की कीमत लगभग एक यूरो (करीब 100 रुपये) रखी गई थी। हजारों लोगों ने यह प्लॉट खरीदे, लेकिन बाद में eBay ने उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया। इसके बावजूद यह पूरी घटना अंतरिक्ष कानून की सीमाओं और लोगों की सोच को लेकर एक अनोखा उदाहरण बन गई।
