पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक लड़ाई अब सिर्फ रैलियों, भाषणों और आरोपों तक सीमित नहीं रही। अब सोशल मीडिया भी चुनावी हथियार बन चुका है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के एक पोस्ट ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक कथित वीडियो साझा किया, जिसमें एक शख्स रंगीन रोशनी वाले कमरे में महिलाओं के साथ फिल्मी गानों पर डांस करता दिखाई दे रहा है। महुआ ने दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा हैं, जो इस समय पश्चिम बंगाल चुनाव में पुलिस ऑब्जर्वर की भूमिका निभा रहे हैं। पोस्ट में महुआ ने तंज भरे अंदाज में उन्हें “फेयर एंड लवली बाबुआ” और “फेंटा कॉप” कहा। इसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई।
आखिर वीडियो विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह विवाद अचानक नहीं शुरू हुआ। इसके पीछे एक पुराना घटनाक्रम भी जुड़ा हुआ है। दरअसल, कुछ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने एक वीडियो साझा किया था, जिसमें आईपीएस अजय पाल शर्मा दक्षिण 24 परगना में तैनाती के दौरान तृणमूल नेता जहांगीर खान के परिवार को सख्त चेतावनी देते दिखाई दिए थे। वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तृणमूल कांग्रेस ने उस वीडियो को आधार बनाकर आरोप लगाया कि बाहरी अधिकारी भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। अब महुआ मोइत्रा का यह नया वीडियो उसी राजनीतिक टकराव का जवाब माना जा रहा है।
वीडियो की सत्यता पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वीडियो असली है?
फिलहाल:
वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह साफ नहीं है कि वीडियो कब का है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस स्थान का है।
वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वास्तव में अजय पाल शर्मा हैं या नहीं, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महुआ मोइत्रा ने हालांकि दावा किया कि वीडियो असली है और उन्होंने कोई फर्जी सामग्री साझा नहीं की।
कौन हैं अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं। उनकी पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी और अपराधियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने वाले अफसर के रूप में रही है। जौनपुर में एसपी रहते हुए उनके नाम बड़ी संख्या में एनकाउंटर कार्रवाई दर्ज होने का दावा किया जाता रहा है। शामली, नोएडा, सहारनपुर और अन्य जिलों में भी उनकी पोस्टिंग के दौरान अपराध नियंत्रण को लेकर उनकी छवि काफी चर्चित रही। फिलहाल वे प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) के पद पर तैनात बताए जाते हैं।
चुनावी माहौल में क्यों बड़ा है यह विवाद?
पश्चिम बंगाल चुनाव पहले ही बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। हिंसा, केंद्रीय बलों की तैनाती, चुनाव आयोग की निगरानी और राजनीतिक आरोपों के बीच अब इस तरह का वीडियो नया विवाद बन गया है। तृणमूल इसे चुनावी निष्पक्षता से जोड़ रही है, जबकि भाजपा खेमे से इस मुद्दे पर अभी बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निजी जिंदगी बनाम सार्वजनिक पद
सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक पक्ष का कहना है कि अगर वीडियो निजी कार्यक्रम का है तो इसे राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। दूसरे पक्ष का तर्क है कि संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारियों की सार्वजनिक छवि और आचरण पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सबकी नजर किस पर?
अब नजर चुनाव आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस और खुद अजय पाल शर्मा की प्रतिक्रिया पर है। अगर इस मामले पर आधिकारिक सफाई आती है तो विवाद की दिशा बदल सकती है। फिलहाल बंगाल चुनाव में यह मामला सोशल मीडिया युद्ध का नया अध्याय बन चुका है, जहां एक वायरल वीडियो ने प्रशासन, राजनीति और नैतिकता—तीनों को बहस के केंद्र में ला दिया है।
