देश में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, और यह अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनता जा रहा है। हालिया रिपोर्टों और अध्ययनों में यह सामने आया है कि महिलाओं में इस बीमारी की पहचान पहले की तुलना में अधिक हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, खानपान और जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
एक महत्वपूर्ण खुलासा यह हुआ है कि बहुत से मामलों में जांच में देरी हो रही है, जिससे बीमारी का पता अंतिम या गंभीर चरण में चलता है। शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या सही समय पर मेडिकल जांच नहीं कराई जाती। इसी वजह से इलाज मुश्किल हो जाता है और मरीजों के ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है।
स्टडी में यह भी पाया गया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के बीच स्क्रीनिंग को लेकर जागरूकता अभी भी पर्याप्त नहीं है। कई महिलाएं नियमित रूप से ब्रेस्ट कैंसर की जांच नहीं करातीं, जिससे बीमारी शुरुआती अवस्था में पकड़ में नहीं आती। डॉक्टरों का कहना है कि समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर का इलाज शुरुआती स्टेज में बहुत अधिक प्रभावी होता है, लेकिन देरी होने पर यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है। ऐसे में इलाज लंबा, महंगा और कठिन हो जाता है। इसलिए समय पर पहचान और तुरंत उपचार शुरू करना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि महिलाओं को आत्म-जांच (self-examination) की आदत डालनी चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही, सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को भी जागरूकता अभियान तेज करने की जरूरत है ताकि इस बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
