बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू हुए बरसों बीत गए, लेकिन जब कानून के रखवालों और बड़े सरकारी बाबुओं के दफ्तर से ही शराब की बोतलें मिलने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला बक्सर जिले से सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
बक्सर के जिला परिवहन कार्यालय (DTO Office) के परिसर में भारी मात्रा में शराब की भरी और खाली बोतलें बरामद हुई हैं। इस घटना के बाद बक्सर सदर के पूर्व कांग्रेस विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी पूरी तरह भड़क गए हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग कर डाली है।
जानकारी के मुताबिक, उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि डीटीओ कार्यालय परिसर में शराब का खेल चल रहा है। गुरुवार (14 मई) को जब टीम ने अचानक दफ्तर के निचले हिस्से, किचन, अलमारी और गार्ड रूम में छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर सब दंग रह गए। तलाशी के दौरान वहां से 7 बोतलें भरी हुई और सैकड़ों खाली विदेशी शराब की बोतलें बरामद की गईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए गार्ड रूम को सील कर दिया और वहां तैनात 4 सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। डीएसपी गौरव पांडे ने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
मुन्ना तिवारी ने सिर्फ शराबबंदी पर ही नहीं, बल्कि डीटीओ दफ्तर में चल रहे भ्रष्टाचार पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्थानीय भाषा और कड़े लहजे में कहा:
"इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए हमें यह बात पता चली। यह पूरे बक्सर और बिहार को शर्मसार करने वाली घटना है। इस दफ्तर में ट्रैक्टरों से ₹9,000 और कोयले के ट्रकों से ₹14,000 से ₹15,000 की अवैध वसूली (नजराना) बांधी गई है। हाल ही में एक ऑडियो भी वायरल हुआ है जिसमें पैसे लेकर ट्रक छोड़ने की बात कही जा रही है। अब जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि ये वसूली अधिकारी शराब के नशे में धुत होकर करते हैं या होश में?"
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जिस इमारत में अवैध तरीके से यह डीटीओ कार्यालय चल रहा है, जब इसका निर्माण हो रहा था तब वह खुद विधायक थे और उस समय विभाग से इसके लिए जरूरी एनओसी (NOC) भी नहीं ली गई थी।
भ्रष्टाचार को किया उजागर: पूर्व विधायक ने मीडिया के सामने कुछ पुख्ता सबूत और शिकायतें रखते हुए आरोप लगाया कि बक्सर के विभिन्न विभागों में बिना 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) के जनता का कोई काम नहीं हो रहा है।
अधिकारियों की मनमानी: उन्होंने कहा कि जिले के कई आला अधिकारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर रहे हैं, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं और आम जनता त्रस्त है।
पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि बक्सर के इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक उच्च स्तरीय जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
अगर बक्सर जिले की जमीनी हकीकत और हालिया घटनाक्रमों पर नजर डालें, तो पूर्व विधायक के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। जिले में भ्रष्टाचार के कई मामले पहले भी सामने आते रहे है
बक्सर के विभिन्न प्रखंडों में दाखिल-खारिज (Mutation), जमीन की रसीद काटने और प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर अक्सर अवैध वसूली की शिकायतें आती रहती हैं। आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं।
विकास योजनाओं में बंदरबांट: सात निश्चय योजना, नल-जल योजना और मनरेगा जैसे जमीनी स्तर के प्रोजेक्ट्स में अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत की खबरें लगातार स्थानीय मीडिया की सुर्खियां बनती हैं। कई जगहों पर बिना काम पूरा हुए ही राशि की निकासी के आरोप भी लगे हैं।
