बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है, लेकिन इस बार चर्चा चुनावी रैलियों से ज्यादा प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर है। बीते 24 घंटों में एजेंसी ने जिस तेजी से छापेमारी, पूछताछ और समन की कार्रवाई की है, उसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

एक अप्रैल से अब तक ईडी कथित धन शोधन से जुड़े कम से कम 19 मामलों की जांच में जुटी हुई है। इन मामलों की जद में मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और राजनीतिक रणनीति से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं।


सबसे ज्यादा चर्चा नुसरत जहां को भेजे गए समन की हो रही है। राशन घोटाले और कथित धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए उन्हें कोलकाता स्थित ईडी दफ्तर बुलाया गया। अभिनेत्री से नेता बनीं नुसरत जहां का नाम सामने आने के बाद यह मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया है।


इसी बीच आई-पैक भी जांच एजेंसियों की रडार पर है। एजेंसी ने आई-पैक के निदेशक ऋषि राज को तलब किया है। इससे पहले निदेशक प्रतीक जैन से भी कई दौर की पूछताछ हो चुकी है, जबकि एक अन्य निदेशक विनेश चंदेल पहले से ही ईडी की हिरासत में बताए जा रहे हैं।


राज्य के शिक्षा विभाग से जुड़े कथित भर्ती घोटाले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष जैन को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी की जा चुकी है।


सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब कोलकाता पुलिस की विशेष शाखा के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर ईडी ने छापा मारा। उन पर निजी मेडिकल कॉलेजों में कथित फर्जी एनआरआई कोटा दाखिले से जुड़े मामले में जांच चल रही है। समन मिलने के बाद से उनके संपर्क में नहीं होने की खबरों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।


ईडी ने जय एस कामदार को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि उनके संबंध गैंगस्टर सोना पप्पू से थे और वे सीमा पार तथा घरेलू हवाला लेनदेन में शामिल थे।


लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने चुनावी माहौल में नया तनाव पैदा कर दिया है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति करार दे रही है। चुनाव से पहले बंगाल में जांच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।