सम्राट चौधरी ने हाल ही में विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए परिवारवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि आज भी कई पार्टियां लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय परिवार आधारित राजनीति को बढ़ावा दे रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने लालू प्रसाद यादव और अखिलेश यादव का नाम लेते हुए कहा कि लालू यादव की बेटी सांसद है और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी संसद में हैं। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि इन दलों में राजनीतिक अवसर परिवार के भीतर ही सीमित रहते हैं।
सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि ऐसे उदाहरण केवल एक-दो पार्टियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस भी लंबे समय से इसी परंपरा का हिस्सा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में नेतृत्व एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमता रहा है, जिससे पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हुआ है। इस संदर्भ में उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी में शीर्ष पदों पर वही परिवार लंबे समय से काबिज है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की राजनीति से आम कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है, क्योंकि उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर नहीं मिल पाते। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में प्रतिभा और मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने की व्यवस्था होनी चाहिए, न कि पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर।
वहीं, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके काम और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का मौका देती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में कई ऐसे नेता हैं जो साधारण पृष्ठभूमि से आकर बड़े पदों तक पहुंचे हैं, जो पार्टी की कार्यशैली को दर्शाता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरमा रहा है और सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिवारवाद का मुद्दा भारतीय राजनीति में हमेशा से एक महत्वपूर्ण बहस का विषय रहा है, और चुनाव के समय यह मुद्दा और अधिक जोर पकड़ लेता है।
कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी का यह बयान विपक्षी दलों पर सीधा हमला है, जिसमें उन्होंने परिवार आधारित राजनीति को लोकतंत्र के लिए चुनौती बताते हुए जनता से इस पर विचार करने की अपी
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