रात की गहरी नींद को अक्सर अच्छी सेहत की निशानी माना जाता है, लेकिन अगर उसी नींद के दौरान आपकी सांस बार-बार रुक रही हो, तो यह एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति सोते समय कई बार सांस लेना बंद कर देता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या जितनी आम होती जा रही है, उतनी ही खतरनाक भी साबित हो रही है।
डॉक्टर्स बताते हैं कि स्लीप एपनिया के मरीजों में तेज खर्राटे, नींद के दौरान घुटन महसूस होना, बार-बार नींद टूटना और दिनभर थकान रहना जैसे लक्षण आम हैं। कई बार लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। मेडिकल रिसर्च भी यह संकेत देती है कि अनट्रीटेड स्लीप एपनिया दिल और दिमाग पर लंबी अवधि का नकारात्मक असर डाल सकता है।
इस बीमारी का सही निदान “स्लीप स्टडी” यानी पॉलीसोमनोग्राफी टेस्ट के जरिए किया जाता है, जिसमें सोते समय शरीर की गतिविधियों को मॉनिटर किया जाता है। इलाज के तौर पर वजन कम करना, लाइफस्टाइल में बदलाव और जरूरत पड़ने पर CPAP मशीन का उपयोग किया जाता है, जो सोते समय सांस को सामान्य बनाए रखने में मदद करती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार तेज खर्राटे, दिन में ज्यादा नींद आना या सुबह सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। क्योंकि स्लीप एपनिया एक “साइलेंट किलर” की तरह काम करता है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है और कई बार देर से पता चलता है।
रात की गहरी नींद को अक्सर अच्छी सेहत की निशानी माना जाता है, लेकिन अगर उसी नींद के दौरान आपकी सांस बार-बार रुक रही हो, तो यह एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति सोते समय कई बार सांस लेना बंद कर देता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या जितनी आम होती जा रही है, उतनी ही खतरनाक भी साबित हो रही है।
डॉक्टर्स बताते हैं कि स्लीप एपनिया के मरीजों में तेज खर्राटे, नींद के दौरान घुटन महसूस होना, बार-बार नींद टूटना और दिनभर थकान रहना जैसे लक्षण आम हैं। कई बार लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। मेडिकल रिसर्च भी यह संकेत देती है कि अनट्रीटेड स्लीप एपनिया दिल और दिमाग पर लंबी अवधि का नकारात्मक असर डाल सकता है।
इस बीमारी का सही निदान “स्लीप स्टडी” यानी पॉलीसोमनोग्राफी टेस्ट के जरिए किया जाता है, जिसमें सोते समय शरीर की गतिविधियों को मॉनिटर किया जाता है। इलाज के तौर पर वजन कम करना, लाइफस्टाइल में बदलाव और जरूरत पड़ने पर CPAP मशीन का उपयोग किया जाता है, जो सोते समय सांस को सामान्य बनाए रखने में मदद करती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार तेज खर्राटे, दिन में ज्यादा नींद आना या सुबह सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। क्योंकि स्लीप एपनिया एक “साइलेंट किलर” की तरह काम करता है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है और कई बार देर से पता चलता है।
