असम की राजनीति की जब भी बात होती है, एक नाम पिछले दशक में सबसे तेज़ उछाल के साथ सामने आता है। हिमांता बिस्वा सरमा।यह वही नेता हैं जिन्होंने कभी कांग्रेस में दो दशक बिताए, लेकिन फिर अचानक पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और देखते ही देखते BJP को असम में नंबर-1 ताकत बना दिया।उनकी कहानी सिर्फ पार्टी बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बनने की है।जहाँ महत्वाकांक्षा, रणनीति और तीखी राजनीतिक समझ, तीनों ने मिलकर एक नया अध्याय लिखा।


कांग्रेस में बढ़ता असर, लेकिन अंदर ही अंदर बढ़ रही थी नाराज़गी

हिमंता बिस्वा सरमा को कांग्रेस में कभी ‘सबसे भरोसेमंद नेता’ माना जाता था।

तरुण गोगोई सरकार में वे सबसे ताकतवर मंत्रियों में थे।लेकिन उनके और मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बीच मतभेद गहरे होते गए।सरमा का आरोप था कि पार्टी उनकी बात को अहमियत नहीं दे रही निर्णय कुछ लोगों तक सीमित हो गए हैं।असम के लिए उनकी योजनाओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।2014–2015 तक बात इतनी बिगड़ चुकी थी कि उनके कांग्रेस छोड़ने की चर्चाएँ तेज़ हो गई थीं।


2015 जब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली

अगस्त 2015 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।यह वह राजनीतिक क्षण था जिसने असम की राजनीति की दिशा बदल दी।दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक इस फैसले को गेम चेंजर कहा गया। बीजेपी के नेताओं ने तुरंत समझ लिया था कि सरमा सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संपत्ति हैं।


BJP को 5 से 100 विधायकों तक पहुँचाने वाली रणनीति

जब हिमंता बीजेपी में आए, पार्टी के पास असम में सिर्फ 5 विधायक थे।लेकिन कुछ ही सालों में बीजेपी को असम में ऐतिहासिक जीत मिलीविधायकों की संख्या 5 से बढ़कर 100 के करीब पहुँच गई पूरा उत्तर-पूर्व राजनीतिक रूप से अचानक BJP की ओर झुक गया।सरमा को NEDA का सबसे बड़ा चेहरा बनाया गया।उत्तर-पूर्व की राजनीति में यह पहली बार हुआ कि एक नेता को चुनाव जिताने वाले मास्टर के रूप में देखा जाने लगा।


2021 आखिर मुख्यमंत्री कैसे बने?

2021 के असम चुनाव में बीजेपी दोबारा सत्ता में आई।लेकिन सबसे बड़ा सवाल था।मुख्यमंत्री कौन बनेगा?एक ओर पुराने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल

दूसरी ओर चुनावी रणनीतिकार हिमंता बिस्वा सरमाकई दौर की बैठकों के बाद पार्टी हाईकमान ने सरमा को चुना।

और फिर वह शपथ लेकर असम के मुख्यमंत्री बन गए।यह वही क्षण था जिसने उनके राजनीतिक सफ़र को नई ऊँचाई दे दी।


सरकार में कामकाज: तेज़ निर्णय, सख़्त छवि और लगातार सुर्खियाँ

मुख्यमंत्री बनने के बाद वे कई कारणों से सुर्खियों में रहे अवैध कब्ज़ों पर कड़ी कार्रवाई।जनसंख्या नियंत्रण पर बयान

मदरसों पर प्रशासनिक कार्रवाई असम-मेघालय सीमा विवाद में निर्णायक भूमिका अपराध और मादक पदार्थों पर शून्य सहनशीलता नीति उनकी कार्यशैली तेज़, आक्रामक और स्पष्ट मानी जाती है।जिससे वे प्रशंसा और आलोचना, दोनों के केंद्र में रहते हैं।

आज स्थिति यह है कि हिमंता बिस्वा सरमा असम के सबसे प्रभावी मुख्यमंत्री

उत्तर-पूर्व में बीजेपी का सबसे बड़ा रणनीतिक चेहराऔर राष्ट्रीय राजनीति में उभरती हुई शक्ति माने जाते हैं।

कांग्रेस छोड़ने के उनके फैसले ने न सिर्फ उनका भविष्य बदला, बल्कि असम की राजनीति के पूरे समीकरण को पलट दिया।