erer | Source: ererनई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की गिनती मौजूदा दौर के सबसे प्रभावशाली गेंदबाजों में होती है। अपनी सटीक लाइन-लेंथ, घातक यॉर्कर और दबाव के क्षणों में विकेट निकालने की क्षमता के कारण उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खास पहचान बनाई है। अब पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज वकार यूनिस ने भी बुमराह की तारीफ की है। हालांकि, उन्होंने भारतीय गेंदबाज को टेस्ट क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शामिल करने के मामले में अपनी राय अलग रखी है। वकार का मानना है कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में बुमराह का कोई जवाब नहीं है, लेकिन टेस्ट प्रारूप में उन्हें अभी खुद को और साबित करना होगा।

सफेद गेंद के क्रिकेट में बुमराह का कोई मुकाबला नहीं: वकार यूनिस

वकार यूनिस ने शुभंकर मिश्रा के यूट्यूब चैनल पर एक पॉडकास्ट के दौरान जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सफेद गेंद के क्रिकेट में बुमराह जैसा गेंदबाज नजर नहीं आता। उनके अनुसार, एकदिवसीय और टी20 प्रारूप में बुमराह का प्रभाव खास तौर पर तब दिखाई देता है, जब टीम मुश्किल परिस्थितियों में फंसी होती है।

वकार ने बुमराह की सबसे बड़ी खूबी बताते हुए कहा कि वह दबाव के समय गेंदबाजी की जिम्मेदारी मिलने पर अक्सर उम्मीदों पर खरे उतरते हैं। उनके मुताबिक, किसी खिलाड़ी का वास्तविक प्रभाव केवल व्यक्तिगत आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय होता है कि वह टीम को मुश्किल हालात से निकालने में कितनी मदद करता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि अगर कोई बल्लेबाज शतक बनाने के बावजूद अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाता, तो उस पारी का अपेक्षित फायदा नहीं मिलता। इसके विपरीत, मुश्किल परिस्थितियों में बनाए गए 40 रन या सही समय पर लिया गया एक विकेट भी मैच का रुख बदल सकता है। वकार के अनुसार, बुमराह ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्हें कठिन समय में गेंद सौंपने पर टीम को उनसे महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद रहती है।

तारीफ के बावजूद टेस्ट क्रिकेट में बुमराह को लेकर क्यों है सवाल?

वकार यूनिस ने बुमराह की सीमित ओवरों की गेंदबाजी की खुलकर प्रशंसा की, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्हें सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शामिल करने से पहले और प्रदर्शन देखने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि बुमराह ने टेस्ट प्रारूप में उतना क्रिकेट नहीं खेला है, जितना कुछ दूसरे शीर्ष तेज गेंदबाजों ने खेला है।

वकार ने इस संदर्भ में ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि इंग्लैंड के अच्छे तेज गेंदबाजों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों का आकलन करते समय लंबे प्रारूप में प्रदर्शन और अनुभव को भी ध्यान में रखना चाहिए।

हालांकि, वकार की इस राय के बीच बुमराह के टेस्ट आंकड़े भी चर्चा का विषय हैं। भारतीय तेज गेंदबाज ने कम समय में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और विदेशी परिस्थितियों में भी अपनी उपयोगिता साबित की है। ऐसे में उन्हें टेस्ट क्रिकेट के शीर्ष गेंदबाजों में शामिल करने को लेकर बहस में उनके प्रदर्शन के साथ-साथ चोटों और सीमित मैचों की भूमिका को भी समझना जरूरी है।

52 टेस्ट में 234 विकेट, बुमराह के आंकड़े क्या कहते हैं?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जसप्रीत बुमराह ने अब तक 52 टेस्ट मैच खेले हैं और 9.7 के औसत तथा 42.8 के स्ट्राइक रेट से 234 विकेट हासिल किए हैं। ये आंकड़े उनकी विकेट लेने की क्षमता और टेस्ट क्रिकेट में प्रभाव को दर्शाते हैं।

बुमराह ने जनवरी 2018 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उन्होंने अपने 11वें टेस्ट मैच में 50 विकेट पूरे किए। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह सबसे तेज भारतीय तेज गेंदबाज बने थे। इसके बाद उन्होंने अपने 24वें टेस्ट में 100 विकेट का आंकड़ा छू लिया।

साल 2019 में बुमराह टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले तीसरे भारतीय गेंदबाज बने। यह उपलब्धि उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल है। उनकी गेंदबाजी की खासियत यह रही है कि वह अलग-अलग परिस्थितियों में बल्लेबाजों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

आईसीसी का बड़ा सम्मान और ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक प्रदर्शन

जसप्रीत बुमराह को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए आईसीसी पुरुष टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर 2024 का पुरस्कार भी मिल चुका है। यह सम्मान टेस्ट क्रिकेट में उनके योगदान और पूरे साल के प्रदर्शन को दर्शाता है।

2024-25 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में बुमराह ने पांच टेस्ट मैचों में 32 विकेट लिए थे। इस प्रदर्शन ने उन्हें सीरीज के सबसे प्रभावशाली गेंदबाजों में शामिल किया। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उनका प्रदर्शन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए महत्वपूर्ण रहा।

इंग्लैंड की परिस्थितियों में भी बुमराह ने अपनी क्षमता दिखाई है। उन्होंने इंग्लैंड में खेले गए 11 टेस्ट मैचों में 51 विकेट हासिल किए। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि विदेशी मैदानों पर भी वह अपनी गेंदबाजी से बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

इन उपलब्धियों के आधार पर बुमराह को टेस्ट क्रिकेट में कम प्रभावशाली गेंदबाज मानना आसान नहीं है। हालांकि, वकार यूनिस की टिप्पणी मुख्य रूप से लंबे प्रारूप में अनुभव और निरंतरता के संदर्भ में है, जिसमें उन्होंने अन्य प्रमुख तेज गेंदबाजों से तुलना की है।

चोटों और वर्कलोड मैनेजमेंट का भी पड़ा असर

जसप्रीत बुमराह के टेस्ट करियर पर चर्चा करते समय उनकी फिटनेस और कार्यभार प्रबंधन को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चोटों के कारण वह ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड की तरह नियमित रूप से टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाए हैं।

तेज गेंदबाजों के लिए लगातार लंबे स्पेल डालना और तीनों प्रारूपों में खेलना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में खिलाड़ियों को चोट से बचाने और उनके करियर को लंबा बनाए रखने के लिए कार्यभार प्रबंधन की रणनीति अपनाई जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, बुमराह ने 2026 में अब तक भारत के लिए कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है। वह अगले महीने न्यूजीलैंड में होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज में खेलते हुए नजर आ सकते हैं। हालांकि, उनके खेलने को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित टीम चयन और उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

क्या टेस्ट क्रिकेट में भी बुमराह को सर्वश्रेष्ठ मानेंगे वकार?

वकार यूनिस की टिप्पणी ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि किसी गेंदबाज की महानता का आकलन किस आधार पर किया जाना चाहिए। सीमित ओवरों के क्रिकेट में बुमराह का प्रभाव, दबाव में विकेट लेने की क्षमता और मैच का रुख बदलने वाला प्रदर्शन उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। दूसरी ओर, टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपलब्धियां, 234 विकेट और विदेशी मैदानों पर रिकॉर्ड भी उनकी क्षमता की गवाही देते हैं।

वकार ने बुमराह की प्रतिभा पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि टेस्ट प्रारूप में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में उनकी जगह को लेकर अधिक अनुभव और प्रदर्शन की जरूरत बताई है। अब न्यूजीलैंड के खिलाफ संभावित टेस्ट सीरीज में बुमराह का प्रदर्शन इस बहस को आगे बढ़ा सकता है। फिलहाल, सीमित ओवरों में उनकी श्रेष्ठता की तारीफ करने वाले वकार टेस्ट क्रिकेट में उनके लिए कसौटी थोड़ी अलग रखते हैं।