बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त भले ही चकाचौंध और फिल्मी दुनिया से दूर न्यूयॉर्क में रहती हैं, लेकिन हाल ही में उनके एक इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। यूट्यूब चैनल 'इंसाइड थॉट्स आउट लाउड' को दिए एक बेहद भावुक इंटरव्यू में त्रिशाला ने अपने बचपन के उन गहरे जख्मों को याद किया, जिससे उनके प्रशंसक भी इमोशनल हो गए

न्यूयॉर्क में अपने नाना-नानी के पास पली-बढ़ीं त्रिशाला ने बताया कि उनके साथ दुर्व्यवहार की शुरुआत तब हुई जब वह महज 5 या 6 साल की थीं।

"मुझे बचपन में बहुत कठिनाइयों और तानों का सामना करना पड़ा क्योंकि मैं एक बच्ची थी और मेरे पास कोई ऐसा 'सुरक्षित स्थान' नहीं था जहां मैं खुलकर रो सकूं। शुरुआत में बच्चों ने मुझे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया क्योंकि मैं भारतीय मूल की थी।"

त्रिशाला का जीवन बचपन से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा। साल 1996 में जब वह केवल 8 वर्ष की थीं, तब उनकी मां ऋचा शर्मा (संजय दत्त की पहली पत्नी) का ब्रेन कैंसर (ग्रेड-4) के कारण निधन हो गया था।

उस समय संजय दत्त भारत में अपने करियर और कानूनी मुकदमों में फंसे थे, जिससे वह लगातार अमेरिका में त्रिशाला के साथ नहीं रह पाते थे।

हाई स्कूल आते-आते जब उनके सहपाठियों को यह पता चला कि वह बॉलीवुड के 'संजू बाबा' की बेटी हैं, तब स्थितियां उनके लिए और ज्यादा पेचीदा और मानसिक रूप से थका देने वाली हो गईं। त्रिशाला ने भावुक होते हुए कहा कि उस दौर में उनके पास ऐसा कोई कंधा नहीं था जिस पर सिर रखकर वह रो सकें।

हालांकि, इन तूफानों ने उन्हें कमजोर बनाने के बजाय मजबूत किया। त्रिशाला ने कहा:

"आज के समय में मुझसे ज्यादा मजबूत चमड़ी किसी की नहीं होगी, क्योंकि मैंने बहुत ही छोटी उम्र में जिंदगी के सबसे बुरे दौर और कड़वाहट को देख लिया है।"

आम जनता को अक्सर लगता है कि स्टार किड्स का जन्म मुंह में चांदी की चम्मच लेकर हुआ है और उनकी जिंदगी में कोई दुख नहीं होता। त्रिशाला ने इस भ्रम को तोड़ते हुए कहा कि आज वह न्यूयॉर्क में एक लाइसेंस प्राप्त मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट के रूप में काम कर रही हैं।

त्रिशाला ने अपने इंटरव्यू का अंत इस प्रेरणादायक संदेश के साथ किया: "मैं खुद परफेक्ट नहीं हूं। मैं खुद कई आंतरिक लड़ाइयों से गुजरी हूं। मैं थेरेपिस्ट इसीलिए बनी ताकि लोगों को यह बता सकूं कि ज़िंदगी में संघर्ष करना पूरी तरह से सामान्य है, और इस लड़ाई में आप अकेले नहीं हैं।"