रांची। झारखंड हाईकोर्ट में पति-पत्नी के विवाद से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पत्नी ने आरोप लगाया कि उसका पति उसके काले रंग, शर्मीले स्वभाव, कम IQ और बातचीत करने के तरीके को लेकर उसे लगातार ताने मारता था। पत्नी की ओर से लगाए गए इन आरोपों के आधार पर पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति के खिलाफ जारी समन आदेश और 498A की कार्यवाही को रद्द कर दिया।
काले रंग और IQ को लेकर तानों का लगाया था आरोप
मामले में पत्नी का आरोप था कि उसका पति उसके रंग-रूप को लेकर उसे परेशान करता था। पत्नी ने कहा कि पति उसके काले रंग को लेकर ताने मारता था। इसके अलावा उसके शर्मीले स्वभाव, कम IQ और बातचीत करने के कथित खराब तरीके को लेकर भी पति की ओर से टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया। पत्नी ने इन घटनाओं को पति की ओर से की जा रही कथित क्रूरता का हिस्सा बताया था।
ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट से हुई थी शादी
इस मामले में पति और पत्नी की शादी एक ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह विवाद इतना बढ़ा कि दोनों अलग रहने लगे और मामला अदालत तक पहुंच गया।
बीमारी को लेकर पति ने पत्नी को घर छोड़ने के लिए कहा
मामले के अनुसार, पति का दावा था कि पत्नी की वजह से उसे एक बीमारी हुई और वह अभी भी उससे पीड़ित है। इसी वजह से पति ने पत्नी से घर छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद पत्नी पहले बेंगलुरु में अपनी छोटी बहन के पास रहने चली गई और बाद में कोलकाता में अपनी बड़ी बहन के पास रहने लगी।
तलाक की अर्जी के बाद पत्नी ने दर्ज कराया आपराधिक मामला
पत्नी के घर से अलग रहने के बाद पति ने रांची के फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। इसके बाद पत्नी ने रांची की अदालत में पति के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया। इसके साथ ही पत्नी ने स्त्रीधन वापस नहीं करने का आरोप भी लगाया। मामले में स्त्रीधन के रूप में करीब 35 लाख रुपये के सामान का उल्लेख किया गया।
निचली अदालत ने पति को जारी किया था समन
इस मामले में रांची के जुडिशल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (XXI) ने 11 जून 2024 को पति को समन जारी किया था। निचली अदालत की ओर से जारी इस आदेश के बाद पति ने हाईकोर्ट का रुख किया। पति ने हाईकोर्ट में निचली अदालत की कार्यवाही और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर जारी समन को चुनौती दी।
हाईकोर्ट में पति ने दी समन आदेश को चुनौती
पति की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अश्विनी प्रिया ने पक्ष रखा। याचिका पर जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने सुनवाई की। मामला आपराधिक याचिका संख्या 484/2025 के रूप में हाईकोर्ट के सामने आया।
हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी कसौटी पर परखे आरोप
झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता की कानूनी कसौटी पर लगाए गए आरोपों को देखा। अदालत ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सही मान भी लिया जाए, तब भी इस मामले में बताए गए आरोप धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता का अपराध नहीं बनाते।
पति के खिलाफ समन और 498A की कार्यवाही रद्द
जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच ने इसी आधार पर रांची की निचली अदालत की ओर से पति के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही धारा 498A के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को भी समाप्त कर दिया गया। इस तरह हाईकोर्ट के फैसले से पति को इस मामले में राहत मिली।
क्या सिर्फ रंग-रूप पर टिप्पणी से 498A का अपराध बनता है?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही रहा कि पत्नी ने पति पर उसके काले रंग, शर्मीले स्वभाव, कम IQ और बातचीत करने के तरीके को लेकर ताने मारने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने इन आरोपों को धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता की कानूनी कसौटी पर परखा। अदालत के सामने सवाल यह था कि शिकायत में बताए गए कथित व्यवहार के आधार पर क्या 498A के तहत आपराधिक कार्यवाही जारी रखी जा सकती है।
कोर्ट ने आरोपों को मानकर भी अपराध नहीं माना
हाईकोर्ट ने मामले में यह महत्वपूर्ण बात कही कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को सच मान लेने के बावजूद धारा 498A के तहत अपराध नहीं बनता। इसी निष्कर्ष के आधार पर अदालत ने निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द कर दिया। यानी अदालत का फैसला इस मामले में लगाए गए आरोपों को सही ठहराने या वैवाहिक रिश्ते में इस तरह की टिप्पणियों को उचित बताने के बजाय यह निर्धारित करने से जुड़ा था कि बताए गए आरोप धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता की कानूनी सीमा में आते हैं या नहीं।
35 लाख रुपये के स्त्रीधन का मामला भी शिकायत का हिस्सा था
पत्नी की ओर से पति के खिलाफ दर्ज शिकायत में केवल रंग-रूप और व्यक्तिगत टिप्पणियों से संबंधित आरोप ही नहीं थे। उसने करीब 35 लाख रुपये के सामान को स्त्रीधन बताते हुए उसे वापस नहीं करने का आरोप भी लगाया था। पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में यह मुद्दा भी शामिल था। हालांकि, उपलब्ध मामले की जानकारी में हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य उल्लेख धारा 498A के तहत की गई कार्यवाही और समन आदेश को रद्द करने से संबंधित है।
शादी के बाद शुरू हुआ विवाद अदालत तक पहुंचा
इस पूरे मामले की शुरुआत एक ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई शादी से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हुआ। अलग रहने, तलाक की अर्जी, उसके बाद आपराधिक शिकायत और निचली अदालत के समन के बाद मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने आरोपों और धारा 498A की कानूनी स्थिति पर विचार करने के बाद पति को राहत दी।
हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य संदेश
झारखंड हाईकोर्ट के इस फैसले में मुख्य प्रश्न यह था कि शिकायत में लगाए गए कथित व्यवहार को धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता माना जा सकता है या नहीं। अदालत ने कहा कि आरोपों को सच मानने के बाद भी इस मामले में 498A के तहत अपराध नहीं बनता। इसी कानूनी निष्कर्ष के आधार पर पति के खिलाफ जारी समन और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई।
निष्कर्ष
झारखंड हाईकोर्ट का यह मामला वैवाहिक विवादों में लगाए जाने वाले आरोपों और धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता की कानूनी सीमा से जुड़ा है। पत्नी ने पति पर उसके काले रंग, शर्मीले स्वभाव, कम IQ और बातचीत के तरीके को लेकर ताने मारने के आरोप लगाए थे। निचली अदालत ने पति को समन जारी किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने पर भी वे धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता का अपराध नहीं बनाते। इसी आधार पर अदालत ने पति के खिलाफ समन आदेश और 498A की कार्यवाही रद्द कर दी।
