tनई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चली अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि उन्हें आशंका थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया। साथ ही उन्होंने सरकार के साथ किसी भी तरह के समझौते के आरोपों को खारिज कर दिया।


क्यों खत्म किया अनशन?

एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें डर था कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने बताया कि उन्हें 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में युवाओं पर हुई पुलिस फायरिंग की घटना याद आ गई थी और उन्हें आशंका थी कि वैसी स्थिति दोबारा बन सकती है। इसी वजह से उन्होंने शांति बनाए रखने की अपील के साथ अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया।


‘सरकार से कोई समझौता नहीं किया’

वांगचुक ने उन आरोपों को खारिज किया कि उन्होंने सरकार के साथ कोई समझौता किया है। उन्होंने कहा कि अगर समझौता ही करना होता, तो वह 26 दिन तक भूख हड़ताल नहीं करते। उनके मुताबिक, उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो।


लिखित आश्वासन मिलने के बाद माने

वांगचुक ने बताया कि मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन नहीं दिया, तब तक उन्होंने अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि मौखिक भरोसे के बजाय उन्होंने लिखित आश्वासन पर जोर दिया।


‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग मेरी प्राथमिकता नहीं थी’

वांगचुक ने कहा कि बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा नहीं उठाया। उनके अनुसार, उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों को एफआईआर और अन्य कानूनी कार्रवाई से बचाना था। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि आंदोलन अपने स्तर पर इस मांग को आगे बढ़ाता रहेगा।


अस्पताल में ‘कैदी जैसा व्यवहार’ का आरोप

सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनके साथ कैदी जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें लोगों से मिलने नहीं दिया गया और मोबाइल फोन व लैपटॉप रखने की भी अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट से मेदांता अस्पताल जाने की अनुमति मिलने के बाद भी उन्हें कई घंटे तक अस्पताल से बाहर नहीं जाने दिया गया।


साथियों की गैरमौजूदगी को बताया सबसे बड़ा दुख

वांगचुक ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि अनशन उनके साथी, छात्र, लद्दाख के प्रतिनिधि और विभिन्न दलों के सांसदों की मौजूदगी में समाप्त हो। लेकिन देर रात परिस्थितियां ऐसी बनीं कि जब उन्होंने अनशन तोड़ा, तब उनके अधिकांश साथी वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने इसे अपने दिल का सबसे बड़ा दुख बताया।


26 दिन से थे अनशन पर

सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे उस आंदोलन का समर्थन कर रहे थे, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही थी।