शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे | Source: Abp Newsशिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे Source : Abp News

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर आमरण भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद सियासी विवाद तेज हो गया है। इस कार्रवाई के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को भी हिरासत में लिया गया। दिपके ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की, जिसके बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे समेत कई विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।

आदित्य ठाकरे ने सरकार पर साधा निशाना

अभिजीत दिपके की पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए आदित्य ठाकरे ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “कितनी शर्म की बात है! पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र को किस तरह बेशर्मी से बलपूर्वक कुचला जा रहा है।”

आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि अब देश में छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को भी बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक अयोग्य मंत्री के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

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20 दिन की भूख हड़ताल के बाद पुलिस ने किया अस्पताल शिफ्ट

सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से NEET पेपर लीक मामले को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। शनिवार (18 जुलाई) सुबह दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर मेडिकल निगरानी में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान मौके पर हल्की अफरा-तफरी भी देखने को मिली।

कार्रवाई के बाद अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और हिरासत में लिया। वहीं, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि वांगचुक को जबरन हटाया गया और छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार की गई। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की, जिसके कारण कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन हालात जल्द ही नियंत्रित कर लिए गए।

संसद मार्च से पहले कार्रवाई पर उठे सवाल

दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई का समय भी चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, CJP ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का आह्वान किया है, जिसके लिए सोनम वांगचुक ने लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। ऐसे में संसद के मानसून सत्र से ठीक 48 घंटे पहले उन्हें जंतर-मंतर से हटाए जाने पर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार इस आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

सोनम वांगचुक और उनके समर्थक NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार 20 दिनों से अधिक समय तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से ज्यादा कम हो चुका है और उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।