rerer | Source: ereनई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET UG) 2026 का परिणाम घोषित होने के बाद अब लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें मेडिकल काउंसलिंग और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट पाने के लिए कितने अंक सुरक्षित माने जा सकते हैं। करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट पारिजात मिश्रा ने पिछले वर्षों के रुझानों के आधार पर संभावित कटऑफ और सेफ स्कोर का अनुमान साझा किया है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए कितना स्कोर हो सकता है जरूरी?

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीटों के लिए हर वर्ष लाखों छात्र प्रतिस्पर्धा करते हैं। अंतिम कटऑफ परीक्षा की कठिनाई, अभ्यर्थियों की संख्या, उपलब्ध सीटों और काउंसलिंग प्रक्रिया पर निर्भर करती है। हालांकि, पिछले वर्षों के रुझानों का विश्लेषण करते हुए एक्सपर्ट ने संभावित स्कोर का अनुमान लगाया है।

करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट पारिजात मिश्रा के अनुसार, अखिल भारतीय कोटा (AIQ) के तहत सामान्य (General) वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट मिलने के लिए लगभग 560 से 563 अंक सुरक्षित माने जा सकते हैं।

550 या उससे अधिक अंक वालों के लिए भी बन सकती है संभावना

एक्सपर्ट के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों ने 550 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उनके लिए भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह संबंधित राज्य, उपलब्ध सीटों, श्रेणी (Category) और काउंसलिंग प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों में राज्य कोटा के अंतर्गत कटऑफ अपेक्षाकृत कम रहती है। ऐसे राज्यों में सामान्य वर्ग सहित अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों को प्रवेश का अवसर मिल सकता है।

हर श्रेणी के लिए अलग होती है कटऑफ

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए कटऑफ सभी श्रेणियों में समान नहीं होती। सामान्य (General), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए अलग-अलग कटऑफ निर्धारित होती है।

इसी कारण अंतिम प्रवेश केवल अंकों पर नहीं, बल्कि संबंधित श्रेणी, सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग में अभ्यर्थियों की प्राथमिकताओं पर भी निर्भर करता है।

संभावित कटऑफ, अंतिम नहीं

पारिजात मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि 560 से 563 अंक का अनुमान पिछले वर्षों के रुझानों के आधार पर लगाया गया है। वास्तविक कटऑफ मेडिकल काउंसलिंग पूरी होने के बाद ही तय होगी। इसलिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया और सीट आवंटन के परिणाम का इंतजार करना चाहिए।

क्वालीफाइंग कटऑफ में दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

एक्सपर्ट के अनुसार, इस वर्ष NEET UG 2026 की क्वालीफाइंग कटऑफ में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सामान्य (General) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए क्वालीफाइंग कटऑफ वर्ष 2025 के 144 अंक से बढ़कर 213 अंक हो गई है। यानी इस बार लगभग 69 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए क्वालीफाइंग कटऑफ 113 अंक से बढ़कर 177 अंक तक पहुंच गई है। इन श्रेणियों में भी लगभग 64 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है।

बढ़ेगा मेडिकल प्रवेश में प्रतिस्पर्धा का स्तर

क्वालीफाइंग कटऑफ बढ़ने का सीधा असर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अधिक संख्या में अभ्यर्थियों के पात्र होने से सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटों पर प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में और अधिक कड़ी रहने की संभावना है।

इसी वजह से काउंसलिंग के प्रत्येक चरण में कटऑफ में बदलाव देखने को मिल सकता है। अभ्यर्थियों को अपनी रैंक, श्रेणी और पसंदीदा कॉलेज के अनुसार सभी काउंसलिंग चरणों में भाग लेने की सलाह दी जाती है।

काउंसलिंग प्रक्रिया पर रहेगी अंतिम नजर

NEET UG 2026 का परिणाम आने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण मेडिकल काउंसलिंग है। इसी प्रक्रिया के दौरान अखिल भारतीय कोटा (AIQ) और राज्य कोटा के तहत विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों का आवंटन किया जाएगा। अंतिम कटऑफ भी इसी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।