erer | Source: ererलंदन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर लंदन में विरोध और समर्थन दोनों सामने आ रहे हैं। भागवत इस सप्ताह बुधवार को लंदन पहुंचे थे और उनका ब्रिटेन दौरा 7 सितंबर तक प्रस्तावित है। इस बीच कुछ नागरिक संगठनों की ओर से उनके दौरे और RSS के कार्यक्रमों का विरोध किया गया है। विरोध के बीच संघ ने स्पष्ट किया है कि वह आलोचना को लेकर बातचीत का रास्ता बंद नहीं करेगा।

RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने शुक्रवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि संघ शांति, एकता और एकजुटता के लिए ब्रिटेन आया है तथा उन सभी लोगों से बातचीत के लिए तैयार है जो संवाद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और आवाजें होना सामान्य बात है तथा इसे बहुत ज्यादा हैरानी की बात नहीं माना जाना चाहिए।

विरोध करने वालों को RSS का सीधा संदेश-आइए बातचीत करें

सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ ने उन लोगों के साथ भी बातचीत का रास्ता खुला रखा है जो उसके विचारों या गतिविधियों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और RSS ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

आंबेकर के मुताबिक, संघ का उद्देश्य शांति, एकता और एकजुटता के संदेश के साथ लोगों के बीच पहुंचना है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग बातचीत करना चाहते हैं, संघ उनके साथ संवाद के लिए तैयार है।

100 से ज्यादा हिंदू संगठनों के समर्थन का दावा

RSS के प्रचार प्रमुख ने ब्रिटेन में मोहन भागवत को मिल रहे समर्थन का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि 100 से ज्यादा स्थानीय हिंदू संगठन भागवत का स्वागत कर चुके हैं और उनके कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सामुदायिक नेताओं के लिए एक बड़े कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा, जिसे 310 संगठन समर्थन दे रहे हैं। RSS की ओर से कहा गया है कि भागवत की यात्रा का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों से संवाद करना और संस्कृति तथा सभ्यता के आधार पर आपसी संपर्क को बढ़ाना है।

RSS ने भागवत की यात्रा को बताया संस्कृति से संस्कृति का संवाद

सुनील आंबेकर ने कहा कि RSS संस्कृति और सभ्यता के आधार पर काम करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और वैश्विक स्तर पर इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उनके अनुसार, मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा लोगों के बीच संस्कृति से संस्कृति के संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश है।

संघ की ओर से यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब ब्रिटेन में कुछ नागरिक संगठनों ने भागवत के दौरे और RSS के कार्यक्रमों पर सवाल उठाए हैं। इस विरोध के बीच संघ ने संवाद को अपना प्रमुख रास्ता बताया है।

15 नागरिक संगठनों ने लंदन के मेयर को लिखा पत्र

मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे का विरोध करने वाले संगठनों ने भी अपनी आपत्ति सार्वजनिक की है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के 15 नागरिक समाज संगठनों और कई लोगों ने बुधवार को लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखा।

पत्र में मांग की गई कि ग्रेटर लंदन अथॉरिटी की किसी जगह को RSS के कार्यक्रम के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाए। इन संगठनों ने अपने विरोध के पीछे RSS के कथित रवैये और विचारधारा से जुड़ी गंभीर आपत्तियों का उल्लेख किया है।

विरोध करने वाले संगठनों ने लगाए गंभीर आरोप

विरोध करने वाले संगठनों ने RSS को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में संगठन को कथित तौर पर ‘तानाशाही सैन्यवादी’ और ‘फासीवादी’ प्रवृत्ति वाला समूह बताया गया है। इन संगठनों ने इसी आधार पर लंदन में RSS के कार्यक्रम को समर्थन नहीं देने की मांग की है।

हालांकि, ये आरोप विरोध करने वाले संगठनों की ओर से लगाए गए हैं। RSS ने इन आरोपों के बीच अपने कार्यक्रमों को शांति, एकता, संवाद और सांस्कृतिक संपर्क से जोड़कर पेश किया है।

लेबर सांसद नादिया व्हिटोम ने भी जताया विरोध

मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर लेबर सांसद नादिया व्हिटोम ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भागवत की यात्रा नफरत फैलाने वाले प्रचारकों और चरमपंथियों को ब्रिटेन में प्रवेश करने से रोकने की प्रतिबद्धता के अनुरूप नहीं है।

उनका यह बयान भी भागवत के दौरे को लेकर ब्रिटेन में चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा है। दूसरी ओर RSS की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि वह अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों के साथ बातचीत के लिए तैयार है।

अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन पहुंचे हैं भागवत

मोहन भागवत ब्रिटेन पहुंचने से पहले अमेरिका और कनाडा का दौरा कर चुके हैं। इसके बाद बुधवार को वह लंदन पहुंचे। ब्रिटेन में उनके कार्यक्रमों को लेकर जहां कुछ संगठनों की ओर से विरोध किया जा रहा है, वहीं RSS का दावा है कि बड़ी संख्या में स्थानीय हिंदू संगठन उनके दौरे का स्वागत और कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को चर्चा में ला दिया है। एक ओर नागरिक संगठनों का विरोध और दूसरी ओर स्थानीय हिंदू संगठनों के समर्थन का दावा सामने आया है। RSS ने इस टकराव के बीच संवाद का रास्ता खुला रखने की बात कही है।

विरोध और समर्थन के बीच संवाद पर RSS का जोर

मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर सामने आए बयानों से स्पष्ट है कि इस यात्रा के दौरान समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। RSS प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि लोकतंत्र में अलग-अलग राय होना सामान्य है और संघ उन लोगों से भी बात करने को तैयार है जो उससे असहमत हैं।

वहीं, विरोध करने वाले नागरिक संगठनों ने लंदन के मेयर से RSS के कार्यक्रम के लिए सरकारी स्थल उपलब्ध नहीं कराने की मांग की है। इस तरह भागवत की ब्रिटेन यात्रा को लेकर बहस केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि RSS की विचारधारा और उसकी विदेशों में गतिविधियों को लेकर भी चर्चा हो रही है।