मुंबई। 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र में पुलिस की पूछताछ और नोटिस जारी किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस उनसे दिल्ली जाने की योजना पूछ रही है और कुछ मामलों में प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का लिखित आश्वासन देने को कहा गया। मुंबई, ठाणे और नागपुर से सामने आए इन दावों ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस छेड़ दी है। महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक कार्यालय के एक अधिकारी ने कुछ स्थानों पर नोटिस जारी किए जाने की बात स्वीकार की, लेकिन राज्य में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के आरोपों से इनकार किया। पुलिस के अनुसार, संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति को देखते हुए कुछ पुलिस आयुक्तालयों और जिला पुलिस अधीक्षकों ने कार्रवाई की है।
घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का आश्वासन मांगने का आरोप
मुंबई के सांताक्रूज इलाके में रहने वाली 31 वर्षीय क्रिएटिव स्ट्रैटेजिस्ट सदफ रजा जैदी ने दावा किया कि पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और 10 अक्टूबर की योजनाओं के बारे में पूछताछ की। उनके अनुसार, पुलिस ने यह भी पूछा कि क्या वह ऐसे लोगों को जानती हैं, जो प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली जाने वाले हैं। जैदी का आरोप है कि उन्हें पुलिस थाने जाकर एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, जिसमें प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की बात लिखी जानी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि संभावित प्रदर्शनकारियों की जानकारी जुटाने के साथ उनसे लाइव लोकेशन साझा करने के लिए कहा गया। जैदी ने इस पूछताछ को जुलाई में नीट से जुड़े प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की घटना से जोड़कर देखा। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के पीछे यही कारण होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का दावा, पुलिस ने आरोप नकारे
सामाजिक संगठन ‘हम भारत के लोग’ ने आरोप लगाया कि मुंबई के एमआईडीसी पुलिस थाने की ओर से कार्यकर्ता फिरोज मिथिबोरवाला और सलीम सबूवाला को हिरासत में लिया गया। मिथिबोरवाला के मुताबिक, 2 अक्टूबर से उन्हें बार-बार बुलाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें करीब दो घंटे तक हिरासत में रखा गया और 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया। दूसरी ओर, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ऐसी किसी हिरासत की घटना से इनकार किया। इस मामले में कार्यकर्ताओं के आरोप और पुलिस का पक्ष अलग-अलग हैं।
दिल्ली जाने के लिए ट्रेन पकड़ी, फिर आया पुलिस का फोन
ठाणे में रहने वाले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के सदस्य मयूर शर्मा ने बताया कि मुंबई और दिल्ली के पुलिस अधिकारियों ने फोन करके उनसे यात्रा की योजना के बारे में सवाल किए। उनके अनुसार, एक महिला ने उनसे पूछा कि वह दिल्ली कैसे जा रहे हैं और क्या उनके साथ कोई समूह भी यात्रा करेगा। शर्मा ने बताया कि उनके साथ केवल पांच-छह दोस्तों के जाने की योजना थी। पुलिस द्वारा रास्ते में रोके जाने की आशंका के चलते उन्होंने और उनके एक दोस्त ने बुधवार शाम बांद्रा टर्मिनस के बजाय बोरीवली से ट्रेन पकड़ी। शर्मा के दावे के मुताबिक, इसके बाद दिल्ली रेलवे पुलिस का फोन आया। अधिकारी ने उनसे यात्रा की जानकारी मांगी और बताया कि मुंबई रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) से मिली सूचना में उनके साथ 25 लोगों के समूह के दिल्ली जाने की बात कही गई थी। शर्मा ने बताया कि हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर पुलिस के इंतजार करने की आशंका के कारण वह फरीदाबाद के पास उतर गए और मेट्रो से दिल्ली पहुंचे। निजामुद्दीन थाने के थाना प्रभारी ने कुछ लोगों को फोन किए जाने की पुष्टि की, लेकिन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई बताया।
नागपुर में भी नोटिस, यात्रा से जुड़ी जानकारी मांगने का आरोप
नागपुर में CJP के स्वयंसेवकों ने आरोप लगाया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मचारियों ने फोन करके दिल्ली जाने वाले लोगों की संख्या और उनकी पहचान के बारे में जानकारी मांगी। कुछ स्वयंसेवकों ने टिकट की प्रतीक्षा सूची की स्थिति से जुड़ी जानकारी देने की पेशकश किए जाने का भी दावा किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर में कम से कम दो स्वयंसेवकों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत नोटिस जारी किए गए। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन से पहले पुलिस की निगरानी और पूछताछ को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया है।
पुलिस की कार्रवाई पर बहस, दोनों पक्षों के दावों पर नजर
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से सामने आए मामलों में कार्यकर्ताओं ने पूछताछ, नोटिस और प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का लिखित आश्वासन मांगे जाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, पुलिस ने कुछ आरोपों का खंडन करते हुए अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा बताया है। फिलहाल, सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले में कार्यकर्ताओं के बयान, पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जारी किए गए नोटिसों की वास्तविक सामग्री महत्वपूर्ण है। विवाद का केंद्र यही सवाल है कि प्रदर्शन से पहले की गई पुलिस कार्रवाई कानून-व्यवस्था की सामान्य प्रक्रिया थी या इससे लोगों की शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भागीदारी प्रभावित हुई।
