PoK में JAAC के लॉन्ग मार्च। | Source: Chrome

PoK में JAAC के लॉन्ग मार्च।Source : Chrome

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। सरकार विरोधी संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि गिरफ्तार नेताओं को रिहा किया जाए, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकी जाए और लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मार्च से पहले पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

JAAC ने क्यों बुलाया लॉन्ग मार्च?

JAAC का कहना है कि सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए पहले ही समय दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद संगठन ने मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। बताया जा रहा है कि रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में लोग इस मार्च में शामिल हो सकते हैं।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शनकारी गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बहाली, सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक, बिजली की दरों में कमी, सस्ती खाद्य सामग्री और बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वे राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी बदलाव चाहते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, टकराव की आशंका

लॉन्ग मार्च को देखते हुए पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने मुजफ्फराबाद और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन प्रदर्शनकारियों को राजधानी तक पहुंचने से रोकने की तैयारी में है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की आशंका भी जताई जा रही है।

हिंसा में बढ़ा मौत का आंकड़ा

हाल के दिनों में कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नई झड़पों में कई लोगों की जान गई है। 5 जून से अब तक हुई घटनाओं में कुल 28 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल बताए गए हैं।

38 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

JAAC का आंदोलन 2025 में पाकिस्तान सरकार के साथ हुए समझौते से जुड़े 38 सूत्रीय एजेंडे पर आधारित है। संगठन का कहना है कि अब तक कई अहम वादे पूरे नहीं किए गए हैं। इनमें बिजली दरों में राहत, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और विधानसभा की कुछ आरक्षित सीटों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

जनजीवन पर पड़ा असर

लगातार प्रदर्शन और बंद के कारण कई इलाकों में बाजार बंद हैं और सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने की भी खबरें हैं। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वहां के हालात लंबे समय से चले आ रहे प्रशासनिक दमन और स्थानीय लोगों की समस्याओं का परिणाम हैं। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले में पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने की दिशा में गंभीरता से ध्यान देगा।