बदलती लाइफस्टाइल और हार्मोनल असंतुलन के इस दौर में महिलाओं में PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome)—जिसे पहले मुख्य रूप से PCOS कहा जाता था—की समस्या तेजी से बढ़ी है। इस बीमारी से जूझ रही महिलाओं के लिए वजन घटाना किसी एवरेस्ट पर चढ़ने जैसा होता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस, थकान और हर वक्त होने वाली फूड क्रेविंग्स के बीच वजन कम करना नामुमकिन सा लगने लगता है।
लेकिन, मशहूर फिटनेस इन्फ्लुएंसर तनिषा चड्ढा ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। तनिषा ने PMOS से जूझते हुए बिना खुद को भूखा रखे, वैज्ञानिक तरीकों से 80 किलो से 58 किलो (22 किलो वजन कम) तक का सफर तय कर एक मिसाल कायम की है। आइए जानते हैं उनकी इस लॉन्ग-टर्म ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी, डाइट, वर्कआउट और लाइफस्टाइल के उन 7 बदलावों के बारे में जिन्होंने यह कमाल कर दिखाया।
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, अब PCOS को व्यापक रूप से PMOS (पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम) के नाम से जाना जा रहा है, क्योंकि यह केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मेटाबॉलिज्म और एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करता है।
तनिषा ने साफ किया कि उन्होंने वजन घटाने के लिए किसी भी 'क्रैश डाइट' या 'कीटो डाइट' का सहारा नहीं लिया। उनके डाइट प्लान के मुख्य स्तंभ इस प्रकार थे ज्यादातर लोग वजन घटाने के लिए अचानक खाना बेहद कम कर देते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म और धीमा हो जाता है। तनिषा ने अपने मेंटेनेंस कैलोरी से केवल 200 से 300 कैलोरी कम खाना शुरू किया। इससे शरीर को पूरी ऊर्जा भी मिलती रही और वजन धीरे-धीरे लेकिन स्थायी रूप से कम हुआ।
PMOS में ब्लड शुगर का उतार-चढ़ाव क्रेविंग्स (मीठा खाने की तीव्र इच्छा) पैदा करता है। तनिषा ने हर भोजन में प्रोटीन (अंडे, पनीर, टोफू, दालें, लीन मीट) को प्राथमिकता दी। हर मील में लगभग 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेने से उनका पेट लंबे समय तक भरा रहा और मसल्स लॉस नहीं हुआ।
दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने (Mindless Snacking) की आदत को छोड़कर उन्होंने दिन में 3 मुख्य और संतुलित भोजन का नियम बनाया, जिनके बीच 4-5 घंटे का अंतर था। इससे इंसुलिन स्पाइक्स को रोकने में मदद मिली।
रिसर्च बताती है कि अगर आपकी नींद पूरी नहीं है, तो दुनिया की कोई भी डाइट काम नहीं करेगी।
तनिषा चड्ढा ने अपनी पोस्ट के जरिए लाखों महिलाओं को प्रेरित करते हुए लिखा— "PMOS में वजन घटाना कुछ हफ़्तों की कड़ी मेहनत का खेल नहीं है, बल्कि सही आदतों को लगातार दोहराने का नाम है।"
