eree | Source: ereनई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ सकती है। अक्टूबर 2026 के मध्य में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल कीमतों में वृद्धि की बात एक अनुमान है, न कि सरकार का घोषित फैसला। यदि यह बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर वाहन चालकों के खर्च से लेकर माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक दिखाई दे सकता है।

नवंबर में क्यों बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के अनुमान का हवाला देते हुए कहा गया है कि केंद्र सरकार नवंबर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित वृद्धि इस साल मई में हुई कुल 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के मुकाबले करीब आधी हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिपोर्ट में जताई गई संभावना को सरकार की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। पेट्रोल-डीजल की वास्तविक कीमतों में बदलाव होगा या नहीं और यदि होगा तो कितना होगा, इसकी पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही हो सकेगी।

विधानसभा चुनावों से पहले कीमतों में बदलाव की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले नवंबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन के लिए संभावित समय के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। ईंधन की कीमतें आम परिवारों के मासिक बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। पेट्रोल महंगा होने पर निजी वाहन चलाने वालों का खर्च बढ़ सकता है, जबकि डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर परिवहन और माल ढुलाई पर पड़ सकता है। इससे बाजार तक सामान पहुंचाने की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है।

मई में 7.5 प्रतिशत बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण तेल बाजार पर दबाव पड़ने की बात कही गई थी। अब नवंबर में एक बार फिर कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चा सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार वृद्धि मई में दर्ज कुल बढ़ोतरी की तुलना में करीब आधी हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में किसी निश्चित रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह कहना अभी संभव नहीं है कि पेट्रोल या डीजल के दाम कितने रुपये बढ़ेंगे।

ईंधन महंगा होने पर बढ़ सकती है खुदरा महंगाई

पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असर केवल वाहन चलाने के खर्च तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, कृषि और माल ढुलाई सहित अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में ईंधन की अहम भूमिका है। ऐसे में यदि ईंधन महंगा होता है, तो वस्तुओं और सेवाओं की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं, जनवरी-मार्च 2027 की तिमाही में इसके 6.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। यदि महंगाई इन स्तरों तक पहुंचती है, तो यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित महंगाई सीमा से ऊपर होगी। हालांकि, ये आंकड़े आर्थिक पूर्वानुमान हैं। वास्तविक महंगाई दर आने वाले महीनों में कीमतों, मांग और अन्य आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है।

आरबीआई के अनुमान से अधिक महंगाई की आशंका

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए खुदरा महंगाई दर 6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। वहीं, जनवरी-मार्च 2027 की तिमाही में महंगाई घटकर 5.7 प्रतिशत पर आने की उम्मीद व्यक्त की गई थी। इसके विपरीत, ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने इन दोनों तिमाहियों के लिए क्रमशः 6.2 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत महंगाई का अनुमान लगाया है। इस तरह संस्था का पूर्वानुमान आरबीआई के अनुमान से अधिक है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने खुदरा महंगाई दर 5.4 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है, जबकि आरबीआई का अनुमान 5.2 प्रतिशत है। इन अनुमानों के बीच अंतर से पता चलता है कि आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।