महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल बीमारी PCOS को अब नए नाम PMOS से जाना जाएगा। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुराना नाम इस बीमारी की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता था। यही वजह है कि अब इसे “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS)” कहा जाएगा।
दरअसल, अब तक लोग PCOS को सिर्फ ओवरी यानी अंडाशय से जुड़ी समस्या मानते थे, जबकि यह बीमारी शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। इसमें हार्मोन गड़बड़ी, वजन बढ़ना, पीरियड्स अनियमित होना, मुंहासे, तनाव, डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा भी शामिल है।
क्या होता है PCOS?
PCOS महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या है। इसमें शरीर में पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) बढ़ जाते हैं। इसकी वजह से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, चेहरे पर बाल आ सकते हैं, वजन बढ़ सकता है और गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।
कई सालों तक लोगों को लगता था कि इस बीमारी में ओवरी में सिस्ट बनते हैं। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड में दिखने वाले ये छोटे-छोटे दाने असल में पूरी तरह विकसित न हो पाए फॉलिकल्स होते हैं, न कि असली सिस्ट।
नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
विशेषज्ञों का कहना है कि “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” नाम लोगों को भ्रमित करता था। कई महिलाओं में सिस्ट होते ही नहीं थे, फिर भी उन्हें PCOS बताया जाता था। इससे बीमारी को समझने और सही इलाज में दिक्कत होती थी।
अब PMOS नाम इस बात को साफ करता है कि यह सिर्फ ओवरी की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर से जुड़ी समस्या है।
शरीर पर कैसे असर डालती है यह बीमारी?
इस बीमारी का असर सिर्फ पीरियड्स तक सीमित नहीं रहता। इससे मोटापा, हाई ब्लड शुगर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा कई महिलाओं में तनाव, चिंता, डिप्रेशन और आत्मविश्वास की कमी जैसी मानसिक समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। मुंहासे, बाल झड़ना और चेहरे पर ज्यादा बाल आना भी इसके आम लक्षण हैं।
क्या इलाज बदल जाएगा?
डॉक्टरों के अनुसार, अभी इलाज और जांच के तरीके में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन नया नाम लोगों को यह समझाने में मदद करेगा कि यह बीमारी सिर्फ प्रजनन क्षमता नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है।
अब डॉक्टर महिलाओं को सिर्फ पीरियड्स ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देने की सलाह देंगे।
भारत में क्यों बढ़ रही चिंता?
भारत में PCOS के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में करीब 16 से 18 प्रतिशत महिलाएं इससे प्रभावित हो सकती हैं। खराब लाइफस्टाइल, तनाव, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके बड़े कारण माने जाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए सिर्फ बाहरी फिटनेस नहीं, बल्कि अंदरूनी स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है।
Disclaimer :
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी बीमारी, लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी दवा या उपचार को शुरू या बंद न करें।
